बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: आरोपी आकाशदीप सिंह की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बताया ‘तर्कसंगत’

 सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में आरोपी आकाशदीप करज सिंह की जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सिद्दीकी की विधवा शहजीन जियाउद्दीन सिद्दीकी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पिछले महीने दिया गया आदेश पूरी तरह से “तर्कसंगत” था।

यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के 9 फरवरी के उस आदेश की पुष्टि करता है, जिसके तहत पंजाब निवासी 22 वर्षीय आकाशदीप सिंह इस मामले में गिरफ्तार 26 लोगों में से जमानत पाने वाले पहले व्यक्ति बने थे।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन की दलीलों पर विचार किया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सिंह के संबंध लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से हैं, जिसे अभियोजन पक्ष ने इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तमाम सबूतों की जांच करने के बाद ही यह पाया था कि सिंह की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।

पीठ ने टिप्पणी की, “यह एक तर्कसंगत निर्णय है… आप सभी को एक ही ब्रश से नहीं रंग सकते। इस व्यक्ति को संबंधित अपराध से जोड़ने के लिए फिलहाल कुछ भी ठोस नहीं है।”

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अदालत ने महाराष्ट्र सरकार के रुख पर भी कड़ा रुख अपनाया। जब राज्य के वकील ने बताया कि वे भी जमानत को चुनौती देंगे, तो पीठ ने कहा, “अब जब मृतक की पत्नी हमारे सामने आई है, तो राज्य सरकार भी अपनी नींद से जाग गई है।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्वीकार किया था कि लॉरेंस और अनमोल बिश्नोई के नेतृत्व वाले संगठित अपराध सिंडिकेट द्वारा किया गया यह अपराध “गंभीर” है। इसके बावजूद, अदालत ने कहा कि वह इस राय पर पहुंचने में असमर्थ है कि आकाशदीप के खिलाफ मकोका के तहत आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।

अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से सिंह द्वारा एक सह-आरोपी को की गई एक फोन कॉल पर टिका था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल एक कॉल किसी व्यक्ति को संगठित अपराध सिंडिकेट से नहीं जोड़ सकती, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि उसे सह-आरोपी की आपराधिक गतिविधियों की पूरी जानकारी थी।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सिंह पर केवल सिंडिकेट का सदस्य होने का आरोप है और हत्या में उनकी कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है। साथ ही, यह भी कहा गया कि निकट भविष्य में ट्रायल शुरू होने की संभावना नहीं है, ऐसे में बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल में रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर, 2024 की रात बांद्रा ईस्ट में उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मुंबई पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को मुख्य साजिशकर्ता और वांछित आरोपी बताया गया है।

जमानत की शर्तों के तहत, सिंह को 1 लाख रुपये का मुचलका देना होगा और ट्रायल पूरा होने तक मुंबई नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

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