केरल हाईकोर्ट में ED का विरोध: पूर्व सीएम के ठिकाने पर छापेमारी के बाद हमला पूर्व-नियोजित साजिश, आरोपी की जमानत का विरोध

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल हाईकोर्ट में एक आरोपी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि इस साल मई में केंद्रीय अधिकारियों पर हुआ हमला कोई अचानक हुआ जनप्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह वित्तीय जांच को बाधित करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित हमला था।

केंद्रीय एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि 27 मई को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर कई घंटों तक चली तलाशी की कार्रवाई पूरी होने के बाद यह हिंसा हुई थी। जब ईडी की टीम वापस लौट रही थी, तब एक उग्र भीड़ ने उनके काफिले को निशाना बनाया। इस हमले में जांच दल का एक सदस्य, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान और एक वाहन चालक घायल हो गए थे।

छापेमारी के बाद गाड़ियों के काफिले पर बोला गया धावा

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बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज करते हुए कि यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का सामान्य मामला या स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन था, एजेंसी ने स्पष्ट किया कि एकत्र हुई भीड़ एक गैर-कानूनी जमावड़ा थी। ईडी के अनुसार, इस हमले का मुख्य मकसद केंद्रीय अधिकारियों को डराना, उनके कानूनी कर्तव्यों में बाधा डालना और आपराधिक न्याय प्रक्रिया को रोकना था।

अधिवक्ता जयशंकर वी. नायर के माध्यम से प्रस्तुत हलफनामे में ईडी ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मिले वैधानिक अधिकारों का पालन कर रहे अधिकारियों पर जानबूझकर हमला किया गया था।

जांच रोकने और अधिकारियों को डराने का आरोप

कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए एजेंसी ने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से एकत्र हुई भीड़ का हर सदस्य समूह द्वारा किए गए कृत्य के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार होता है, भले ही उस व्यक्ति विशेष ने हथियार का इस्तेमाल न किया हो या सीधे तौर पर हिंसा न की हो।

जमानत अर्जी का विरोध करते हुए ईडी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच अभी जारी है। घटना में करीब 300 लोग शामिल थे, जिनमें से कई संदिग्ध अब भी फरार हैं या उनकी पहचान की जा रही है। साथ ही, कई मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होना अभी बाकी है, इसलिए इस स्थिति में आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

क्या है पूरा मामला और वित्तीय लेनदेन के आरोप?

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यह मुख्य जांच रेत खनन करने वाली कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड’ (CMRL) और पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी टी. वीणा की आईटी कंसल्टेंसी फर्म ‘इक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से संबंधित है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि 2017 से 2020 के दौरान खनन कंपनी ने इक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को ऐसी सेवाओं के लिए भुगतान किया, जो वास्तव में कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं। हालांकि, टी. वीणा और खनन कंपनी दोनों ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि यह भुगतान एक वैध व्यावसायिक समझौते के तहत किया गया था।

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