मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण में कहा है कि यदि कोई वयस्क पत्नी अपनी मर्जी से किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने के लिए चली जाती है, तो उसके पति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वयस्क पत्नी की अपनी मर्जी से रवानगी के मामलों में हैबियस कॉर्पस का अधिकार क्षेत्र सीमित है और पति को अन्य कानूनी मंचों पर राहत मांगनी चाहिए। हालांकि, बेंच ने नाबालिग बच्चों के भविष्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और जस्टिस पी. धनबल की खंडपीठ ने एस. मुरुगन की याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिन्होंने अपनी 23 वर्षीय पत्नी भवानी और दो नाबालिग बच्चों (उम्र 3.5 वर्ष और 2 वर्ष) को बरामद करने की मांग की थी।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता मुरुगन ने अदालत को बताया कि 6 मार्च 2026 को उसकी पत्नी और दोनों बच्चे अचानक लापता हो गए। इस संबंध में उथुमलाई पुलिस स्टेशन में ‘महिला गुमशुदगी’ की FIR (क्राइम नंबर 58/2026) दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस मामले में ढिलाई बरत रही है और उसके परिवार को तीसरे प्रतिवादी, राजा, से खतरा हो सकता है।
पक्षों के तर्क
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक ने पुलिस जांच के आधार पर कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने तीसरे प्रतिवादी (राजा) के साथ संबंध विकसित कर लिए थे। अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से राजा के साथ गई है और जाते समय अपने दोनों बच्चों को भी साथ ले गई है।
मुरुगन के वकील ने तर्क दिया कि पत्नी की पसंद जो भी हो, याचिकाकर्ता अपने छोटे बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए गंभीर रूप से चिंतित है, इसलिए उन्हें कोर्ट में पेश किया जाना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां
अदालत ने वयस्क पत्नी की अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जाने की स्वतंत्रता और बच्चों के कल्याण के मुद्दों को अलग-अलग श्रेणी में रखा। पत्नी की स्थिति पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:
“जहां तक याचिकाकर्ता की पत्नी का संबंध है, ऐसा प्रतीत होता है कि उसने तीसरे प्रतिवादी के साथ संबंध विकसित कर लिए हैं। इसलिए, यदि वह तीसरे प्रतिवादी के साथ जाने का विकल्प चुनती है, तो हैबियस कॉर्पस याचिका में बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है और याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट के समक्ष अपनी पत्नी के खिलाफ कानूनी उपाय तलाशने होंगे।”
हालांकि, बेंच ने बच्चों के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह उन बच्चों को लेकर अधिक चिंतित है जिन्हें मां अपने साथ ले गई है।
अदालत का निर्णय
मामले का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी: पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे पत्नी और दोनों बच्चों का पता लगाकर उन्हें जल्द से जल्द न्यायिक मजिस्ट्रेट, अलंगुलम के समक्ष पेश करें।
- सूचना: पेशी की तारीख के बारे में याचिकाकर्ता को पहले से सूचित किया जाए।
- बयान और बातचीत: न्यायिक मजिस्ट्रेट पत्नी का बयान दर्ज करेंगे। बच्चों के संबंध में, मजिस्ट्रेट उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे और उनकी स्थिति का आकलन कर “कानून के अनुसार आवश्यक निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ेंगे।”
- रिपोर्ट: इस पूरी प्रक्रिया के संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट को हाईकोर्ट को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी।
मामले का विवरण
- केस टाइटल: एस. मुरुगन बनाम पुलिस अधीक्षक, तेनकासी जिला और अन्य
- केस नंबर: H.C.P.(MD)No.335 of 2026
- कोरम: जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और जस्टिस पी. धनबल
- आदेश की तिथि: 17.03.2026

