सांप के जहर मामले में एल्विश यादव को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की FIR

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मशहूर यूट्यूबर और रियलिटी टीवी स्टार एल्विश यादव के खिलाफ 2023 के सांप के जहर मामले में दर्ज FIR और उसके बाद की सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया है।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 22 नवंबर 2023 को दर्ज किए गए आपराधिक मामले का अंत हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत मामले की प्रक्रियात्मक वैधता पर सवाल उठाए। पीठ ने पाया कि FIR का आधार बनने वाली शिकायत उस व्यक्ति द्वारा दर्ज नहीं की गई थी, जो इस अधिनियम के तहत इसके लिए अधिकृत (Authorized) हो।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह मामला कानूनन बना नहीं रह सकता क्योंकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत शिकायत किसी अधिकृत व्यक्ति द्वारा दर्ज नहीं की गई थी।”

इसके अलावा, कोर्ट ने NDPS एक्ट की धाराओं पर भी स्पष्टता दी। पीठ ने कहा कि सह-अभियुक्तों के पास से बरामद तरल पदार्थ (एंटी-वेनम) NDPS शेड्यूल के तहत निर्धारित प्रतिबंधित पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए ये धाराएं लागू नहीं होती हैं।

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अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश की FIR में लगाई गई भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं काफी हद तक गुरुग्राम में दर्ज एक पुरानी जांच पर आधारित थीं। चूंकि गुरुग्राम मामले में पहले ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी थी, इसलिए अदालत ने नोएडा में इस कार्यवाही को जारी रखने का कोई ठोस आधार नहीं पाया।

FIR रद्द होने के साथ ही, ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी चार्जशीट और संज्ञान (Cognisance) आदेश भी निष्प्रभावी हो गए हैं। इससे पहले 6 अगस्त 2024 को शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

‘बिग बॉस OTT 2’ के विजेता एल्विश यादव को 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने नोएडा में आयोजित रेव पार्टियों में नशे के रूप में सांप के जहर का इस्तेमाल और सप्लाई की है।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर बताते हुए चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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सुनवाई के दौरान यादव के वकील ने तर्क दिया था कि:

  • एल्विश यादव के पास से कोई सांप या नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।
  • यादव और अन्य सह-अभियुक्तों के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हो सका।
  • शिकायतकर्ता ने खुद को पशु कल्याण अधिकारी बताया था, जबकि वह उस समय उस पद पर नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि अभियोजन पक्ष का मामला कानूनी और प्रक्रियात्मक रूप से कमजोर था।

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