मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग और मतगणना के समय वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े टेंडर की शर्तों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टेंडर की शर्तों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
यह याचिकाएं नई दिल्ली और चेन्नई की दो निजी सर्विलांस कंपनियों द्वारा दायर की गई थीं। उन्होंने 3 मार्च 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी ई-टेंडर की कुछ शर्तों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और अव्यवहारिक बताते हुए चुनौती दी थी। इस टेंडर के तहत करीब 75,000 मतदान केंद्रों पर लगभग 1.5 लाख वेब-आधारित कैमरे लगाने और मतगणना केंद्रों पर 3,744 कैमरे स्थापित करने की योजना है।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि टेंडर की शर्तें मनमानी, पक्षपातपूर्ण या दुर्भावनापूर्ण हैं।
पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि उच्चतम न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि टेंडर जारी करने वाली प्राधिकरण को यह अधिकार है कि वह काम को सही तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक योग्यता और शर्तें तय करे।
अदालत ने यह भी कहा कि टेंडर की शर्तों को केवल इसलिए बदला नहीं जा सकता कि वे किसी विशेष याचिकाकर्ता के लिए अनुकूल हो जाएं। तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञता रखने वाली प्राधिकरण ही इन शर्तों को तय करने के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं और संबंधित अंतरिम आवेदन भी समाप्त कर दिए।

