भारतीय विधिज्ञ परिषद् (BCI) ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के नामांकन (Enrolment) और वकालत की स्थिति (Practice Status) को लेकर पश्चिम बंगाल राज्य विधिज्ञ परिषद् (State Bar Council) को एक सख्त निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद की गई है, जिनमें बताया गया था कि 14 मई 2026 को सुश्री बनर्जी कलकत्ता हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं की आधिकारिक पोशाक और ‘व्हाइट बैंड’ पहनकर उपस्थित हुई थीं।
एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत स्थापित वैधानिक निकाय BCI ने संज्ञान लिया कि सुश्री ममता बनर्जी, जिन्होंने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, हाईकोर्ट में कानूनी वेशभूषा में दिखीं। BCI ने स्पष्ट किया कि ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स’ के भाग VI, अध्याय IV (“फॉर्म ऑफ ड्रेसेस ऑर रोब्स टू बी वोर्न बाई एडवोकेट्स”) के तहत सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अन्य न्यायिक निकायों के समक्ष उपस्थित होने वाले अधिवक्ताओं के लिए पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और ड्रेस कोड के कड़े मानक निर्धारित हैं।
BCI के निर्देश और तथ्यों का सत्यापन
पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सचिव को लिखे पत्र में BCI ने कहा है कि वह फिलहाल इस पेशी की वैधता पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है, लेकिन 15 वर्षों तक एक संवैधानिक सार्वजनिक पद पर रहने के कारण उनके नामांकन और प्रैक्टिस की तथ्यात्मक स्थिति का सत्यापन आवश्यक है।
BCI ने राज्य बार काउंसिल को दो दिनों के भीतर (16 मई 2026 तक) निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है:
- नामांकन विवरण: उनका नामांकन नंबर और पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल के साथ उनके नामांकन की सही तारीख।
- वर्तमान स्थिति: क्या उनका नाम वर्तमान में काउंसिल द्वारा बनाए गए अधिवक्ताओं के राज्य रोल (State Roll) में दर्ज है।
- प्रैक्टिस का निलंबन: क्या उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल (2011-2026) के दौरान कभी भी वकालत के स्वैच्छिक निलंबन या समाप्ति की सूचना दी थी।
- प्रैक्टिस की बहाली: क्या उसके बाद उनके द्वारा प्रैक्टिस फिर से शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया गया था और क्या उसे राज्य बार काउंसिल द्वारा स्वीकार किया गया था।
- प्रैक्टिस सर्टिफिकेट: क्या उनके पक्ष में कोई वैध और सक्रिय ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (COP) या वर्तमान रिकॉर्ड उपलब्ध है।
रिकॉर्ड का संरक्षण और प्रमाणीकरण
BCI ने आदेश दिया है कि दी गई जानकारी पूरी तरह से आधिकारिक रिकॉर्ड, नामांकन रजिस्टर और आवक (Inward) रजिस्टरों पर आधारित होनी चाहिए। राज्य बार काउंसिल के सचिव को यह प्रमाणित करना होगा कि प्रदान की गई प्रतियां मूल रिकॉर्ड की सत्य प्रतिलिपियां हैं।
इसके अलावा, साक्ष्यों की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए BCI ने कड़ी चेतावनी दी है:
“जवाब जमा होने तक, संबंधित मूल रिकॉर्ड को उनके वर्तमान स्वरूप में सुरक्षित रखा जाए और कानून के अनुसार तथा BCI को पूर्व सूचना दिए बिना उक्त विषय से संबंधित किसी भी रिकॉर्ड में कोई बदलाव, सुधार, ओवरराइटिंग या पुनर्निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।”
इस मामले को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए 48 घंटों के भीतर जवाब मांगा गया है।

