केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा सरकारी अधिकारियों को राज्य सरकार की उपलब्धियों से जुड़े ईमेल और संदेश भेजे जा रहे हैं, जो चुनाव प्रचार के समान हैं। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यह याचिका खारिज करते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
यह याचिका मलप्पुरम के एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रशीद अहमद और तिरुवनंतपुरम स्थित सचिवालय में कार्यरत क्लेरिकल असिस्टेंट अनिल कुमार के. एम. ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सरकारी कर्मचारियों को ऐसे संदेश भेजे जा रहे हैं जिनमें राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।
याचिका में कहा गया था कि इन संदेशों को भेजने के लिए सरकारी कर्मचारियों के निजी डेटा का इस्तेमाल किया गया। उनका दावा था कि यह डेटा सर्विस एंड पेरोल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपॉजिटरी फॉर केरल (SPARK) प्रणाली से लिया गया, जिसका उपयोग आमतौर पर कर्मचारियों को वेतन और अन्य लाभों के क्रेडिट की सूचना देने के लिए किया जाता है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केस्मार्ट (KSMART — Kerala Solutions for Managing Administrative Reformation and Transformation) प्रणाली से भी डेटा लेकर इन संदेशों को भेजा गया।
हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।
उल्लेखनीय है कि SPARK केरल सरकार के वित्त विभाग की एक ई-गवर्नेंस पहल है, जो वर्ष 2007 से संचालित हो रही है। इसका उद्देश्य राज्य के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मानव संसाधन प्रबंधन और वेतन संबंधी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करना है।

