सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश की; स्थानांतरण नीति में बड़ा बदलाव

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 फरवरी, 2026 को हुई अपनी बैठक में मद्रास और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। इस निर्णय के साथ ही कॉलेजियम ने न्यायिक प्रशासन में सुधार के उद्देश्य से एक नई नीति की भी घोषणा की है, जिसके तहत भावी मुख्य न्यायाधीशों को रिक्ति होने से पहले ही संबंधित हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मदरास हाईकोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। जस्टिस धर्माधिकारी वर्तमान में केरल हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनका मूल (पैरेंट) हाईकोर्ट मध्य प्रदेश है।

यह सिफारिश मद्रास हाईकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की 5 मार्च, 2026 को होने वाली सेवानिवृत्ति के मद्देनजर की गई है।

न्यायिक दक्षता पर नीतिगत निर्णय

न्याय प्रशासन की गुणवत्ता और दक्षता को मजबूत करने के लिए कॉलेजियम ने एक दूरगामी नीति अपनाई है। इसके तहत, जिस न्यायाधीश को किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालना है, उन्हें रिक्ति होने से लगभग दो महीने पहले ही वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। कॉलेजियम के वक्तव्य के अनुसार:

“कॉलेजियम ने एक नीतिगत निर्णय लिया है कि… एक न्यायाधीश जिसे मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालना है, उसे रिक्ति उत्पन्न होने से काफी पहले, अधिमानतः दो महीने पहले स्थानांतरित किया जा सकता है, ताकि वह इस बीच उस हाईकोर्ट के कामकाज से अच्छी तरह परिचित हो सके और निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति पर तुरंत कार्यभार ग्रहण कर सके।”

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए सिफारिश

इस नई नीति को लागू करते हुए, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस लीसा गिल को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है।

प्रस्ताव के अनुसार, स्थानांतरण के बाद उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाएगा। यह नियुक्ति उस तिथि से प्रभावी होगी जिस दिन वहां मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त होगा। इस कदम का उद्देश्य जस्टिस गिल को पद संभालने से पहले आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक परिवेश को समझने का पर्याप्त अवसर प्रदान करना है।

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कॉलेजियम की ये सिफारिशें अब औपचारिक मंजूरी और अधिसूचना के लिए केंद्र सरकार के पास भेजी जाएंगी।

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