केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सबरीमला मंदिर में श्रद्धालुओं को बेचे जाने वाले पवित्र प्रसाद ‘अडिया सिष्टम घी’ की बिक्री में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में प्रथम आरोपी एवं पूर्व विशेष अधिकारी संतोष कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने याचिका को अस्वीकार करते हुए कहा कि मामले में लापता धनराशि तथा उसके उपयोग का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
इस प्रकरण की शुरुआत केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के उस निर्देश से हुई थी, जिसमें सबरीमला विशेष आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) को मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया गया था।
इसके बाद VACB ने हाल ही में सम्पन्न तीर्थ सीजन के दौरान सबरीमला मंदिर में सेवा दे चुके अधिकारियों सहित कुल 33 व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
विजिलेंस के अनुसार घी बिक्री में ₹36.24 लाख की अनियमितताएं पाई गईं।
याचिकाकर्ता ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए कहा कि:
- उन्हें 60 प्रतिशत दृष्टि-दोष है,
- कथित अनियमितताओं में उनकी कोई भूमिका नहीं है, और
- उनकी गिरफ्तारी जांच के लिए आवश्यक नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा 60 प्रतिशत दृष्टि-दोष का दावा किए जाने के बावजूद उनके पास मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस है।
अदालत ने यह भी माना कि मामले में कथित गबन की गई राशि और उसके उपयोग का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
इन परिस्थितियों में अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और जांच एजेंसी को आरोपी से हिरासत में पूछताछ करने की अनुमति दी।

