2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे साज़िश मामला: सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद दिल्ली अदालत ने चार आरोपियों के रिहाई आदेश जारी किए

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे साज़िश मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत पाने वाले चार आरोपियों के ज़मानती शर्तें पूरी करने के बाद उनकी रिहाई के आदेश जारी किए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान और मोहम्मद सलीम खान द्वारा दाखिल ₹2 लाख के व्यक्तिगत मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों को स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए। अदालत ने यह आदेश दिल्ली पुलिस द्वारा सभी जमानतदारों और दस्तावेजों के सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करने के बाद दिया।

हालांकि, पांचवें आरोपी शादाब अहमद, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी ज़मानत दी थी, ने अभी तक अदालत में उपस्थित होकर ज़मानती बॉन्ड दाखिल नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को दिए गए आदेश में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को ज़मानत दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा था कि सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं और “भागीदारी के पदानुक्रम” के आधार पर अंतर किया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि खालिद और इमाम के खिलाफ यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने जिन आरोपियों को ज़मानत दी, उन पर 11 कड़ी शर्तें लागू कीं, जिनमें शामिल हैं:

  • ₹2 लाख के व्यक्तिगत मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों की ज़मानत, जिसे ट्रायल कोर्ट संतोषजनक माने।
  • दिल्ली (एनसीटी) की सीमाओं को बिना अनुमति पार न करना।
  • किसी भी यात्रा के लिए ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति लेना और यात्रा का कारण स्पष्ट करना।
  • पासपोर्ट जमा करना।
  • वर्तमान आवासीय पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जांच अधिकारी और अदालत को देना।
  • किसी भी गवाह या मुकदमे से जुड़े व्यक्ति से संपर्क न करना, न ही उन्हें प्रभावित करना।
  • उस संगठन या समूह से किसी प्रकार का संबंध न रखना जो वर्तमान एफआईआर से संबंधित हो।
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अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपियों के मोबाइल लंबे समय से बंद हैं, इस कारण संपर्क विवरण उपलब्ध नहीं कर पाए हैं। वकीलों ने भरोसा दिलाया कि मोबाइल चालू होते ही सारी जानकारी अदालत को दे दी जाएगी।

मंगलवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को दस्तावेजों और जमानतदारों के सत्यापन का निर्देश दिया था, जिसके चलते रिहाई आदेश में एक दिन की देरी हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी आरोपी ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो ट्रायल कोर्ट उसके ज़मानत आदेश को रद्द कर सकता है, बशर्ते आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

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