केरल हाई कोर्ट ने मुन्नमबम निवासियों से जमीन कर स्वीकारने का निर्देश दिया, स्वामित्व विवाद पर अंतिम निर्णय तक मिलेगी राहत

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एर्नाकुलम ज़िले के मुन्नमबम क्षेत्र के निवासियों से जमीन कर स्वीकार करे, जब तक उनकी संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता।

जस्टिस सी जयचंद्रन ने यह अंतरिम आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिनमें निवासियों ने कहा था कि जारी मुकदमेबाज़ी और ज़िला प्रशासन द्वारा कर न स्वीकारने के कारण वे भूमि कर अदा नहीं कर पा रहे थे।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को याद दिलाया कि हाई कोर्ट ने 10 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में मुन्नमबम की भूमि को वक्फ के रूप में घोषित करने को केरल वक्फ बोर्ड की “भूमि हड़पने की रणनीति” बताया था। उस आदेश में सरकार द्वारा विवादित भूमि के स्वामित्व की जांच के लिए आयोग नियुक्त करने के कदम को भी बरकरार रखा गया था।

इसी आधार पर निवासियों ने अदालत से आग्रह किया कि कर स्वीकारने के साथ-साथ नामांतरण (mutation), संपत्ति के हस्तांतरण, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट जारी करने और भूमि के विक्रय-क्रय जैसी नियमित प्रक्रियाओं की अनुमति भी दी जाए।

अदालत ने निवासियों की कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए एर्नाकुलम ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया कि वह भूमि कर स्वीकार करना शुरू करे। मामला 17 दिसंबर को फिर सुना जाएगा।

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हाई कोर्ट के आदेश के बाद मलनकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च ने कहा कि यह मुन्नमबम निवासियों के लिए राहत है, क्योंकि भूमि कर न स्वीकारे जाने के चलते वे कोई भी भूमि-संबंधी लेन-देन पूरा नहीं कर पा रहे थे। चर्च ने इस आदेश को “सत्य की जीत” बताया।

चेरई और मुन्नमबम के निवासी वर्षों से आरोप लगाते रहे हैं कि केरल वक्फ बोर्ड पंजीकृत टाइटल डीड और पुराने भूमि कर रिकॉर्ड होने के बावजूद उनके भूखण्डों पर अवैध दावा कर रहा है।

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विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सी एन रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग नियुक्त किया था, जो सभी दावों की जांच कर रहा है।

अदालत का यह अंतरिम आदेश निवासियों को अस्थायी राहत देता है, जिससे वे कर भुगतान और अन्य भूमि-संबंधी औपचारिकताएं फिर से शुरू कर सकेंगे, जबकि आयोग अपनी जांच जारी रखे हुए है और अदालत में मुख्य मामले का निपटारा लंबित है।

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