हाईकोर्ट से ZEE5 की डॉक्यू-सीरीज को मिली हरी झंडी: कोर्ट ने कहा—टाइटल से हटाएं ‘लॉरेंस’ और ‘पंजाब’ जैसे शब्द

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (ZEE5) की विवादित डॉक्यू-सीरीज की रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। सोमवार को एक अहम फैसले में अदालत ने केंद्र सरकार की उस एडवाइजरी को रद्द कर दिया, जिसने इस सीरीज के प्रसारण पर रोक लगा रखी थी। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया है कि मेकर्स को अपनी इस सीरीज के नाम से “लॉरेंस” और “पंजाब” शब्दों को हटाना होगा।

यह कानूनी जीत ‘ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के लिए बड़ी राहत बनकर आई है, जिसने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने प्रोजेक्ट को बीच में ही रोक दिया था।

जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने सीरीज के कंटेंट की समीक्षा करने के बाद केंद्र के रुख को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील अमित झांजी के अनुसार, अब यह सीरीज “लॉरेंस ऑफ पंजाब” के नाम से रिलीज नहीं होगी। अदालत का मानना है कि ब्रांडिंग से इन विशिष्ट नामों को हटाकर संगठित अपराध के महिमामंडन (glorification) की चिंताओं को कम किया जा सकता है, जबकि डॉक्यूमेंट्री के तथ्यात्मक कंटेंट को दर्शकों तक पहुंचने दिया जा सकता है।

कोर्ट ने स्वयं इस डॉक्यू-सीरीज को देखने के बाद यह टिप्पणी की कि निर्माण के किसी भी हिस्से में किसी विशेष अपराधी को ‘नायक’ के रूप में पेश करने की कोशिश नहीं की गई है।

विवाद की शुरुआत पिछले महीने हुई थी जब 27 अप्रैल को होने वाली इसकी रिलीज पर केंद्र ने रोक लगा दी थी। पंजाब पुलिस ने आशंका जताई थी कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर कथित रूप से आधारित यह सीरीज राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

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सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल एम एस बेदी ने रिलीज का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि इस तरह का कंटेंट संगठित अपराध को ‘सामान्य’ बनाने का काम करता है और युवाओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि वे पहले ही सोशल मीडिया से ऐसे 2,600 से अधिक वीडियो और पोस्ट हटा चुके हैं जो ‘गैंगस्टर कल्चर’ को बढ़ावा देते थे।

पंजाब पुलिस ने पहले केंद्र को सूचित किया था कि इस सीरीज में नाटकीय चित्रण और वास्तविक फुटेज का इस्तेमाल किया गया है, जो आपराधिक तत्वों की पहुंच को और बढ़ा सकता है। इसी आधार पर मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अपराधियों पर आधारित कंटेंट के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी थी।

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दूसरी ओर, सीरीज के निर्माताओं का तर्क है कि यह कोई ‘श्रद्धांजलि’ नहीं बल्कि एक विश्लेषणात्मक ‘केस स्टडी’ है। उन्होंने इसे छात्र राजनीति, विचारधारा और मीडिया के प्रभाव के बीच एक अपराधी के उभरने की यात्रा के रूप में परिभाषित किया है।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद, अब ज़ी5 जल्द ही नए शीर्षक के साथ इस सीरीज की रिलीज डेट की घोषणा कर सकता है।

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