सिर्फ गैंगस्टर से संबंध होने पर जब्त नहीं हो सकती संपत्ति: उत्तराखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी आरोपी या गैंगस्टर के साथ पारिवारिक, सामाजिक या व्यक्तिगत संबंध होने के आधार पर सरकार किसी व्यक्ति की संपत्ति को कुर्क (ज़ब्त) नहीं कर सकती है।

हाई कोर्ट के जस्टिस आशीष नैथानी की एकल पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत पांच लोगों की संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने रेखांकित किया कि जांच एजेंसियां और न्यायिक अधिकारी केवल सामान्य आरोपों या सामाजिक रिश्तों का हवाला देकर किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्ज़ा नहीं कर सकते।

अपने फैसले में जस्टिस नैथानी ने कहा, “केवल इस तथ्य के आधार पर कि कोई व्यक्ति किसी कथित गिरोह के सदस्य का रिश्तेदार, साथी या परिचित है, उस व्यक्ति के नाम पर दर्ज संपत्ति की कुर्की को कानूनन सही नहीं ठहराया जा सकता।”

निचली अदालत के ‘सतही’ रवैये पर हाई कोर्ट की फटकार

इस मामले में पांच प्रभावित पक्षों ने पहले हरिद्वार की विशेष अदालत (गैंगस्टर एक्ट) में अपनी संपत्तियों को मुक्त कराने की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ वे हाई कोर्ट पहुंचे थे।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि निचली अदालत (विशेष न्यायाधीश/द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हरिद्वार) ने बेहद सामान्य और सतही तरीके से फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों की गहन समीक्षा करने के बजाय मुख्य आरोपी और उसके गिरोह पर लगे सामान्य आरोपों को ही सच मान लिया।

READ ALSO  जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की पेशी के लिए जारी की नई एसओपी

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि राज्य सरकार किसी संपत्ति को कुर्क करना चाहती है, तो उसे पुख्ता और निष्पक्ष सबूतों के साथ यह साबित करना होगा कि उस संपत्ति को सीधे तौर पर अपराध की कमाई से खरीदा गया था।

किन संपत्तियों पर छिड़ा था कानूनी विवाद?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत एक मुख्य आरोपी और उसके सहयोगियों पर शिकंजा कसा था। सरकार का आरोप था कि इस संगठित गिरोह ने अपराध के जरिए अकूत संपत्ति कमाई है। इसी कार्रवाई के तहत प्रशासन ने निम्नलिखित कीमती संपत्तियों को कुर्क कर लिया था:

  • उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जिले के चितेहरा गांव में स्थित जमीन के कई टुकड़े।
  • शानदार गाड़ियां, जिनमें टोयोटा फॉर्च्यूनर (Toyota Fortuner) और इनोवा क्रिस्टा (Innova Crysta) शामिल थीं।
READ ALSO  दोस्त पर हमला करने के जुर्म में व्यक्ति को तीन साल सश्रम कारावास की सजा

बचाव पक्ष का तर्क: ‘कानूनी कमाई और पुख्ता दस्तावेज’

अपीलकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डी. के. शर्मा (सहयोगी वकील शुभांग डोभाल और भारत चौधरी) ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन पक्ष के पास इन संपत्तियों का किसी भी तरह के अपराध से जुड़ाव साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।

बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने सभी कानूनी दस्तावेज पेश किए, जिनमें शामिल थे:

  • वैध और पंजीकृत सेल डीड (रजिस्ट्री के कागजात)
  • बैंकों के माध्यम से किए गए पारदर्शी वित्तीय लेनदेन
  • राजस्व विभाग के आधिकारिक म्यूटेशन रिकॉर्ड (दाखिल-खारिज)
  • कुछ मामलों में पैतृक रूप से मिली विरासत के दस्तावेज

वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सरकार यह बताने में नाकाम रही है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए किसी तरह की जबरन वसूली या डराने-धमकाने का सहारा लिया गया था। राज्य सरकार ने किसी पीड़ित का बयान या शिकायत भी दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल ‘गैंगस्टर के साथ जान-पहचान’ होने के कारण की गई, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है।

सरकार की दलील: ‘अपराध की काली कमाई के सीधे लाभार्थी’

दूसरी ओर, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अपर महाधिवक्ता दिनेश चौहान और अधिवक्ता विपुल पैन्यूली ने कुर्की का पुरजोर समर्थन किया। उनकी दलीलें थीं:

  • बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेज यह साबित करने के लिए नाकाफी हैं कि यह संपत्तियां पूरी तरह से कानूनी आय से ही खरीदी गई थीं।
  • संगठित अपराध के मामलों में किसी व्यक्तिगत शिकायतकर्ता या पीड़ित का न होना अभियोजन के पक्ष को कमजोर नहीं करता।
  • आरोपियों के मुख्य गैंगस्टर के साथ बेहद करीबी संबंध हैं, जिससे साफ है कि वे अपराध की काली कमाई के सीधे लाभार्थी रहे हैं।
READ ALSO  कटक में होने वाले आगामी त्योहारों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ओडिशा हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

क्यों खास है हाई कोर्ट का यह फैसला?

उत्तराखंड हाई कोर्ट का यह फैसला पुलिस और प्रशासन द्वारा गैंगस्टर एक्ट जैसी सख्त धाराओं के मनमाने इस्तेमाल पर एक मजबूत कानूनी अंकुश है। अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी अपराधी को जानना भर आपको अपराधी या उसकी संपत्ति का हिस्सेदार नहीं बना देता। जब तक संपत्ति और अपराध के बीच सीधा और अटूट संबंध (Traceable Connection) साबित नहीं होता, तब तक नागरिक के संपत्ति के अधिकार को नहीं छीना जा सकता।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles