सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न और शारीरिक हमले के आरोपी 32 वर्षीय प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी की याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट 27 जुलाई को सुनवाई करेगा। आरोपी अधिकारी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। हालांकि, सरकारी वकील द्वारा पुलिस अधिकारियों से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय कर दी।
एफआईआर और मुख्य आरोप
अत्तापुर थाना पुलिस ने 30 वर्षीय महिला प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी की शिकायत पर 18 जुलाई को मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग), महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने और अभद्र व्यवहार से जुड़ी धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी अधिकारी 23 जून से एक मैसेजिंग ऐप के जरिए उसे अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेज रहा था। इसके साथ ही वह अकादमी में सहकर्मियों के सामने पीड़िता पर अभद्र टिप्पणियां करता था। उसने पीड़िता पर किसी अन्य प्रशिक्षु के साथ संबंध होने के झूठे आरोप लगाए, गाली-गलौज की और जबरन बात कबूलने का दबाव बनाया।
कमरे में बंधक बनाने और ब्लैकमेल का आरोप
शिकायत के अनुसार, 9 जुलाई को आरोपी ने पीड़िता का रास्ता रोककर उसे जबरन अपने कमरे में खींच लिया। वहां उसने पीड़िता के बाल पकड़े, गला घोंटने का प्रयास किया और गर्दन पर चाकू रखकर कमरे से बाहर जाने से रोक दिया। इसके अलावा, आरोपी पर महिला की सहमति के बिना उसका निजी वीडियो बनाने और ब्लैकमेल करने की नीयत से उस वीडियो को पीड़िता के पति को भेजने का भी गंभीर आरोप है।
अस्पताल में भर्ती और पृष्ठभूमि
मामला दर्ज होने के दो दिन बाद, 20 जुलाई को आरोपी अधिकारी एक स्थानीय फ्लैट में बेहोश पाया गया था, जिसके बाद उसके भाई और परिचितों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों ने किसी जहरीले पदार्थ के सेवन की आशंका जताई थी, हालांकि चिकित्सकों ने पेट की सफाई (गैस्ट्रिक वॉश) के बाद किसी भी असामान्य तत्व की पुष्टि नहीं की और उसकी हालत स्थिर बताई।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में चयन से पहले आरोपी अधिकारी आंध्र प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था।

