लिफ्ट लगाने का काम अधूरा छोड़ने पर उपभोक्ता आयोग का सख्त रुख, 12% ब्याज के साथ 3 लाख रुपये लौटाने का आदेश

तेलंगाना के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने समय पर लिफ्ट स्थापित न करने और काम बीच में ही छोड़ने के मामले में एक लिफ्ट इंस्टॉलेशन कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह हैदराबाद के संपत्ति मालिक को अग्रिम राशि के रूप में लिए गए 3 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही उपभोक्ता को हुए मानसिक कष्ट और वित्तीय नुकसान के लिए 35,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान (मुआवजा एवं कानूनी खर्च) करने का भी निर्देश दिया गया है।

समय पर काम पूरा न होने से मकान मालिक को नुकसान

आयोग के अध्यक्ष वक्कंती नरसिम्हा राव तथा सदस्य पी वी टी आर जवाहर बाबू और डी श्रीदे की पीठ ने 20 जुलाई को पारित अपने आदेश में कहा कि कंपनी द्वारा 45 दिनों की तय सीमा के भीतर लिफ्ट लगाने में विफल रहने के कारण संपत्ति मालिक अपनी अलवाल स्थित संपत्ति को किराए पर नहीं दे सका। इससे उपभोक्ता को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि मानसिक परेशानी और असुविधा का भी सामना करना पड़ा।

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10 दिन काम करके बिना बताए गायब हुई कंपनी

मामले के विवरण के अनुसार, हैदराबाद निवासी शिकायतकर्ता ने 20 जून 2024 को एक औद्योगिक लिफ्ट निर्माण कंपनी के साथ 6.50 लाख रुपये का अनुबंध किया था। समझौते की शर्तों के तहत काम जून 2024 में शुरू होना था और इसे 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाना था। अनुबंध वाले दिन ही शिकायतकर्ता ने 3 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान चेक के माध्यम से किया था।

कंपनी ने शुरुआत में सिविल कार्य और स्ट्रक्चरल छड़ों (रॉड) को लगाने का काम शुरू किया, लेकिन लगभग 10 दिनों के बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के काम रोक दिया। बाद में जब संपत्ति मालिक ने निरीक्षण किया, तो पाया कि लिफ्ट के फ्रेम और दरवाजे का आकार स्वीकृत डिजाइन से मेल नहीं खा रहा था। लंबे समय तक काम बंद रहने और लापरवाही के कारण लगे हुए धातु के हिस्से जंग खाकर खराब हो गए।

व्हाट्सएप संदेशों और कानूनी नोटिस का नहीं दिया जवाब

शिकायतकर्ता ने फोन कॉल, टेक्स्ट संदेशों और व्हाट्सएप के माध्यम से कंपनी से संपर्क करने की बार-बार कोशिश की, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब या काम की स्थिति के बारे में कोई अपडेट नहीं मिला। उपभोक्ता ने आयोग के समक्ष स्थल की तस्वीरें और व्हाट्सएप बातचीत के स्क्रीनशॉट सबूत के तौर पर पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि कंपनी ने भुगतान लेने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया।

कंपनी ने शिकायतकर्ता द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कंपनी का कोई प्रतिनिधि सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते आयोग ने इस मामले में एकतरफा फैसला सुनाया।

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रिफंड और वित्तीय जुर्माने का विवरण

उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 3 लाख रुपये की अग्रिम राशि पर भुगतान की तारीख से लेकर पूरी वसूली होने तक 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करे।

इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा और असुविधा के एवज में 25,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 10,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने इन सभी भुगतानों को आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर पूरा करने की समय सीमा तय की है।

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