अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर हफ्ते भर में सुनवाई करे कलकत्ता हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी की विदेश में आंखों के इलाज से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से एक हफ्ते के भीतर सुनवाई करने का अनुरोध किया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश तब दिया जब उन्हें सूचित किया गया कि इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा अब तक कोई तारीख तय नहीं की गई है। बनर्जी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने शीर्ष अदालत को बताया कि डायमंड हार्बर से सांसद ने विदेश में आंखों के उपचार के लिए अपनी शर्तों में ढील देने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका लंबित है और उस पर कोई तारीख तय नहीं दिखती, इसलिए हाईकोर्ट इस पर शीघ्र विचार करे।

हाईकोर्ट की शर्तों को दी गई चुनौती

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ के 20 जुलाई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौगत भट्टाचार्य ने बनर्जी को दंडात्मक कार्रवाई से मिली अंतरिम राहत को 6 अक्टूबर या अगले आदेश तक बढ़ा दिया था। हालांकि, इसके साथ ही अदालत ने उनसे जांच में पूरा सहयोग करने और बिना पूर्व अनुमति के देश से बाहर न जाने की शर्त को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि वह अगस्त महीने में शर्तों में बदलाव की याचिका पर सुनवाई करेगा, लेकिन इसके लिए कोई विशिष्ट तिथि निर्धारित नहीं की गई थी।

चुनावी भाषण से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा से जुड़ा है। बनर्जी पर प्रतिद्वंद्वी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे रद्द कराने के लिए उन्होंने अदालत का रुख किया है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच जारी रहने के कारण उन्हें विदेश यात्रा की तत्काल अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कोलकाता में कई प्रतिष्ठित नेत्र अस्पताल मौजूद हैं। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से यह सुझाव भी दिया था कि टीएमसी सांसद सरकारी एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के समक्ष पेश हों, जो यह तय करेंगे कि उनकी आंख की समस्या का इलाज वहां संभव है या नहीं।

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