सुप्रीम कोर्ट में योग दिवस: सीजेआई सूर्य कांत बोले—तनाव से निपटने और मानसिक शांति के लिए योग एक जरूरी निवेश

सुप्रीम कोर्ट परिसर में रविवार को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक विशेष योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने जजों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ के साथ योग किया। सीजेआई ने न्याय प्रणाली के अत्यधिक व्यस्त और तनावपूर्ण माहौल का जिक्र करते हुए सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की।

सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि योग दिवस अब हमारे वार्षिक कैलेंडर का एक स्थाई हिस्सा बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आयोजन के जरिए हम असल में अपनी समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सदियों पुरानी सभ्यता ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि स्वास्थ्य का मतलब केवल शारीरिक रूप से फिट होना नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच एक बेहतरीन तालमेल है। योग इसी जीवन दर्शन को व्यावहारिक रूप देने का एक शाश्वत माध्यम है।

न्यायिक कामकाज के तनाव के बीच सेहत जरूरी

अदालती कामकाज के भारी दबाव का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा कि न्याय प्रशासन से जुड़े लोगों की जिंदगी बेहद व्यस्त होती है। यहां रोज फाइलों के भारी बोझ और सख्त समय सीमा के बीच काम करना पड़ता है। इस लगातार बने रहने वाले दबाव का सीधा असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक ऊर्जा पर पड़ता है। उन्होंने आगाह किया कि पेशेवर जिम्मेदारियों को पूरा करने की होड़ में अक्सर लोग अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं, जिसे बदलना बेहद जरूरी है।

योग के लिए जरूरी नहीं घंटों का वक्त

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मुख्य न्यायाधीश ने योग से जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि इसके लिए शरीर का बहुत अधिक लचीला होना या घंटों का समय निकालना जरूरी नहीं है। खुद को योग का एक सतत शिक्षार्थी बताते हुए उन्होंने साझा किया कि हर दिन की व्यस्तता के बीच सिर्फ कुछ मिनटों की गहरी सांसें या हल्की स्ट्रेचिंग भी तनाव को प्रबंधित करने में बड़ा बदलाव ला सकती है।

सीजेआई के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से न केवल दिमाग शांत होता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि शारीरिक क्षमता भी मजबूत होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी सेहत का ख्याल रखना कोई विलासिता नहीं है, बल्कि यह खुद में और इस न्याय प्रणाली की संस्था में किया गया एक आवश्यक निवेश है।

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केवल एक दिन नहीं, रोज की आदत बनाएं

योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक सुबह का आयोजन नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक स्वस्थ आदत की शुरुआत करने का बेहतरीन जरिया है। योग के वास्तविक और दीर्घकालिक फायदे साल में एक बार योगाभ्यास करने से नहीं, बल्कि इसे रोज नियम से करने से मिलते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कोर्ट के कर्मचारी और अधिकारी सुबह दस मिनट के ध्यान या शाम को काम के बाद हल्की स्ट्रेचिंग से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

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कार्यक्रम के अंत में उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री टीम का आभार व्यक्त किया और कर्मचारियों से अपील की कि वे योग के इस अनुभव को केवल दफ्तर की मेज तक सीमित न रखकर अपने घरों तक ले जाएं और इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

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