दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत किसी भूमि मालिक का मुआवजा पहले ही दोबारा निर्धारित हो चुका हो, तब भी वह उसी अधिग्रहण से जुड़े समान स्थिति वाले भूमि मालिकों को हाईकोर्ट द्वारा बाद में दिए गए बढ़े हुए मुआवजे का लाभ पाने का हकदार हो सकता है। जस्टिस अमित महाजन ने तीन संबंधित अपीलों को मंजूर करते हुए अपीलकर्ताओं को जमना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में हाईकोर्ट द्वारा तय बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना।
हाईकोर्ट ने रेफरेंस कोर्ट के उस निष्कर्ष को गलत माना, जिसके तहत कहा गया था कि धारा 28A के तहत पहले मुआवजे का पुनर्निर्धारण हो जाने के बाद अपीलकर्ता बाद में अपीलीय अदालत द्वारा बढ़ाए गए मुआवजे का लाभ नहीं मांग सकते।
मामले की पृष्ठभूमि
अपीलकर्ता स्काई हाई एग्रो एक्सपो प्राइवेट लिमिटेड, मोनिका गर्ग और सुपर्ब एग्रो एक्सपो प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के बक्करवाला गांव की राजस्व सीमा में स्थित जमीन के मालिक थे। उनकी जमीन भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत 17 जून 2005 की अधिसूचना और धारा 6 के तहत 31 मई 2006 की अधिसूचना के आधार पर अधिग्रहित की गई थी।
भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने अवार्ड संख्या 1/DC(W)/2006-07 के जरिए अधिग्रहित जमीन की कीमत ₹15,70,000 प्रति एकड़ निर्धारित की थी।
इसी अधिसूचना और अवार्ड के तहत जमीन गंवाने वाले कुछ अन्य भूमि मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने के लिए रेफरेंस याचिकाएं दाखिल कीं। इनमें कैलाशवती बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में अपर जिला जज ने 26 अप्रैल 2010 को मुआवजा बढ़ाकर ₹20,35,255 प्रति एकड़ कर दिया और वैधानिक लाभ भी दिए। इसके बाद अपीलकर्ताओं ने धारा 28A के तहत अपने मुआवजे के पुनर्निर्धारण के लिए अलग-अलग आवेदन दाखिल किए।
इन आवेदनों के लंबित रहने के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2011 को जमना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में उसी अधिसूचना और अवार्ड से संबंधित बक्करवाला गांव की जमीन का मुआवजा और बढ़ा दिया।
बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 29 मई 2013 को अपीलकर्ताओं के धारा 28A के आवेदन मंजूर किए और कैलाशवती के फैसले के अनुसार मुआवजा दोबारा निर्धारित किया। हालांकि, जमना मामले में हाईकोर्ट द्वारा बाद में तय की गई बढ़ी हुई दर का लाभ उन्हें नहीं दिया गया।
इसके बाद अपीलकर्ताओं ने धारा 28A(3) के तहत रेफरेंस मांगा। उनका दावा था कि जमना के फैसले के अनुसार वे ₹23,93,227.20 प्रति एकड़ मुआवजे के हकदार हैं। रेफरेंस कोर्ट ने उनकी मांग खारिज कर दी और माना कि उन्हें कैलाशवती के आधार पर धारा 28A का लाभ पहले ही मिल चुका है।
हाईकोर्ट में पक्षों की दलीलें
अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उनकी जमीन उसी गांव में थी और उसका अधिग्रहण भी उसी अधिसूचना और अवार्ड के तहत हुआ था, जिससे जमना मामला संबंधित था। ऐसे में कैलाशवती के आधार पर पहले हुआ पुनर्निर्धारण उन्हें जमना में बाद में मिले अतिरिक्त बढ़े हुए मुआवजे से वंचित नहीं कर सकता।
दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने कहा कि अपीलकर्ताओं को देय मुआवजा पहले ही निर्धारित हो चुका था और वह फैसला अंतिम हो चुका है। यह भी दलील दी गई कि उन्हें अधिग्रहित जमीन का उचित बाजार मूल्य मिल चुका है और मुआवजे में और बढ़ोतरी का कोई आधार नहीं है।
रेफरेंस कोर्ट का नजरिया गलत: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने रेफरेंस कोर्ट के दृष्टिकोण को गलत पाया। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ताओं के धारा 28A(1) के आवेदन पहले ही स्वीकार किए जा चुके थे और प्रतिवादियों द्वारा उन्हें चुनौती नहीं दिए जाने के कारण वह आदेश अंतिम हो चुका था।
ऐसी स्थिति में रेफरेंस कोर्ट के सामने यह सवाल नहीं था कि अपीलकर्ता पहली बार धारा 28A का लाभ पाने के हकदार थे या नहीं। उसके सामने मुद्दा यह था कि क्या हाईकोर्ट के बाद के फैसले के आधार पर उन्हें अतिरिक्त बढ़े हुए मुआवजे का लाभ मिल सकता है।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले अंदनय्या एवं अन्य बनाम डिप्टी चीफ इंजीनियर एवं अन्य पर भरोसा किया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि हाईकोर्ट द्वारा मुआवजा बढ़ाए जाने के बाद धारा 28A के तहत दूसरा आवेदन भी विचार योग्य है। रेफरेंस कोर्ट के अवार्ड के आधार पर पहले मुआवजा प्राप्त कर लेना, उसी भूमि मालिक को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाद में बढ़ाए गए मुआवजे के आधार पर पुनर्निर्धारण मांगने से नहीं रोकता।
समान स्थिति वाले भूमि मालिकों के बीच मुआवजे में समानता के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था:
“अंततः धारा 28A का उद्देश्य मुआवजे के भुगतान में समान स्थिति वाले भूमि मालिकों के बीच समानता और बराबरी बनाए रखना है।”
दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को मौजूदा मामले पर लागू किया और कहा कि धारा 28A की आवश्यक शर्तें पूरी करने वाला व्यक्ति उस बढ़े हुए मुआवजे का लाभ पाने का भी हकदार है, जो समान स्थिति वाले अन्य भूमि मालिकों को आगे की अपील में मिला हो।
कोर्ट ने स्पष्ट किया:
“चूंकि अपीलकर्ताओं को पहले ही भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28A के तहत मुआवजे का हकदार माना जा चुका है, इसलिए वे समान स्थिति वाले व्यक्तियों को दिए गए बढ़े हुए मुआवजे के भी हकदार होंगे।”
हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों अपीलकर्ताओं को जमना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में को-ऑर्डिनेट बेंच द्वारा दिए गए बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना। कोर्ट ने तीनों अपीलें संबंधित परिणामी राहतों के साथ मंजूर कर लीं और लंबित आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया।
केस टाइटल: स्काई हाई एग्रो एक्सपो प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य व संबंधित मामले
केस नंबर: LA.APP. 76/2019, LA.APP. 77/2019 एवं LA.APP. 78/2019
बेंच: जस्टिस अमित महाजन
तारीख: 14 सितंबर 2026

