सुप्रीम कोर्ट ने कहा- महंगाई भत्ता कानूनी अधिकार, पश्चिम बंगाल सरकार को 2008–2019 की बकाया राशि देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) कोई अनुग्रह नहीं बल्कि कानूनी रूप से प्रवर्तनीय अधिकार है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अपने कर्मचारियों को वर्ष 2008 से 2019 तक की बकाया DA राशि में से 25% हिस्सा 6 मार्च 2026 तक चुकाने का निर्देश दिया है। साथ ही भुगतान की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार के कुछ कर्मचारियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर DA और बकाया भुगतान की मांग की थी। मई 2022 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए राज्य को केंद्र के समान DA दरें लागू करने और बकाया चुकाने का निर्देश दिया।

इसके खिलाफ नवंबर 2022 में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। तब से राज्य सरकार ने DA में कुछ आंशिक वृद्धि की, लेकिन यह केंद्र की दरों से काफी कम रही। अप्रैल 2025 तक केंद्र सरकार के कर्मचारी जहां 55% DA पा रहे हैं, वहीं बंगाल के राज्य कर्मचारी मात्र 18% DA ही पा रहे थे।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा:

“महंगाई भत्ता प्राप्त करना पश्चिम बंगाल राज्य के कर्मचारियों का एक कानूनी अधिकार है… वर्ष 2008 से 2019 की अवधि के लिए कर्मचारी बकाया भुगतान के हकदार होंगे।”

READ ALSO  "स्वतंत्र देश में वयस्क अपनी पसंद से विवाह के लिए स्वतंत्र": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाहित जोड़े को दी पुलिस सुरक्षा, दो महीने में पंजीकरण की रखी शर्त

कोर्ट ने महंगाई भत्ते को कल्याणकारी राज्य की एक रक्षा कवच की तरह बताया:

“महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त लाभ नहीं बल्कि न्यूनतम जीवन स्तर बनाए रखने का एक साधन है।”

लगभग ₹41,000 करोड़ की अनुमानित बकाया राशि को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति का गठन किया, जिसमें होंगे:

  • जस्टिस इंदु मल्होत्रा (पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश)
  • जस्टिस तरलोक सिंह चौहान (पूर्व मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश, उच्च न्यायालय)
  • जस्टिस गौतम भादुरी (पूर्व मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश, उच्च न्यायालय)
  • भारत के महालेखाकार (CAG) या उनके द्वारा नामित वरिष्ठतम अधिकारी
READ ALSO  State Employees on Deputation Not Eligible for Pension Under Central Civil Service: Supreme Court

समिति निम्नलिखित कार्य करेगी:

  • कुल देय राशि का निर्धारण
  • भुगतान की समयसारणी बनाना
  • भुगतान की समय-समय पर निगरानी करना

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया:

  • कुल बकाया राशि का 25% भाग 6 मार्च 2026 तक दिया जाए
  • समिति की सिफारिश के अनुसार पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च 2026 तक किया जाए
  • राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी
  • जिन कर्मचारियों ने इस मुकदमे के लंबित रहने के दौरान सेवा निवृत्ति ली है, उन्हें भी इस आदेश के अनुसार लाभ मिलेगा
READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले में कुलदीप सेंगर की अंतरिम जमानत बढ़ाई

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से पश्चिम बंगाल के हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलेगी। कोर्ट ने न केवल DA को एक कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता दी, बल्कि उसके भुगतान के लिए एक स्पष्ट ढांचा भी तैयार किया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles