एडीएजी बैंकिंग घोटाले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अनिल अंबानी को अंतिम नोटिस, CBI-ED से 10 दिन में स्टेटस रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) को एक जनहित याचिका (PIL) में ताजा नोटिस जारी किया है। इस याचिका में अदालत की निगरानी में एक विस्तृत जांच की मांग की गई है, जिसमें एडीएजी और उसकी सहयोगी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी जांचों की स्थिति पर रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपें।

कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देश दिया कि अनिल अंबानी और एडीएजी को नोटिस की विधिवत तामील सुनिश्चित की जाए और इस पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अनिल अंबानी और एडीएजी के लिए जवाब दाखिल करने का “अंतिम अवसर” है।

यह याचिका भारत सरकार के पूर्व ऊर्जा सचिव ईएएस शर्मा द्वारा दाखिल की गई है। उन्होंने एडीएजी समूह पर सार्वजनिक धन की हेराफेरी, झूठे वित्तीय आंकड़ों का निर्माण और संस्थागत मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस मामले में पहले 18 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई, ईडी, अनिल अंबानी और एडीएजी को नोटिस जारी किया था। लेकिन जवाब दाखिल न होने पर अब अदालत ने अंतिम चेतावनी देते हुए नया नोटिस जारी किया है।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यह मामला “संभवतः भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला” है। उन्होंने कहा कि यह घोटाला 2007-08 से चल रहा है, लेकिन सीबीआई ने केवल 2025 में एफआईआर दर्ज की।

भूषण ने जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बैंकों और उनके अधिकारियों की संलिप्तता की जांच नहीं कर रही हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सीबीआई और ईडी को इस बारे में स्पष्ट स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए।

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि अदालत यह जाने कि आखिर वे क्या जांच कर रहे हैं, क्योंकि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की जांच स्पष्ट रूप से नहीं हो रही है।”

अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो सीबीआई और ईडी की ओर से पेश हुए, को निर्देश दिया कि वे दोनों एजेंसियों की जांच पर स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में 10 दिनों में दाखिल करें। इसके बाद इस याचिका पर सुनवाई तय की गई है।

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इस जनहित याचिका में कहा गया है कि एडीएजी समूह की विभिन्न कंपनियों में सुनियोजित तरीके से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है, वित्तीय दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया और यह सब संस्थागत स्तर पर मिलीभगत से संभव हुआ। याचिकाकर्ता का कहना है कि जो एफआईआर दर्ज की गई है और ईडी की कार्रवाई चल रही है, वह केवल पूरे घोटाले का एक छोटा सा हिस्सा है।

उन्होंने अदालत से मांग की है कि जांच पर न्यायालय की निगरानी हो ताकि निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित की जा सके।

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