सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजा रघुवंशी हत्या मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, जस्टिस एम.एम. सुन्दरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मेघालय सरकार की याचिका पर सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी किया और कहा कि अदालत पहले ट्रायल की प्रगति पर नजर रखेगी। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर कुछ आपत्तियां भी जताईं, लेकिन यह देखते हुए कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इस स्तर पर जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
मेघालय सरकार ने जमानत आदेश को दी चुनौती
मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया जब 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने शिलांग की ट्रायल कोर्ट द्वारा 27 अप्रैल को दिए गए जमानत आदेश को बरकरार रखा।
राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोनम रघुवंशी के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं और उन्हें केवल तकनीकी आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान उन्होंने पुणे फोर्ट हत्या मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें केतन अग्रवाल की कथित हत्या उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी द्वारा किए जाने का आरोप है।
ट्रायल कोर्ट ने किन आधारों पर दी थी जमानत
ट्रायल कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को जमानत देते हुए कहा था कि जांच एजेंसी गिरफ्तारी के आधार कानून के अनुसार बताने में विफल रही।
अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी मेमो, जस्टिफिकेशन चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के अंश सहित कई दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने कहा कि एक जैसी गलती का कई दस्तावेजों में दोहराया जाना केवल टाइपिंग की त्रुटि नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, किसी भी दस्तावेज से यह स्पष्ट नहीं था कि सोनम रघुवंशी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही, गिरफ्तारी के समय उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के तथ्य भी उन्हें नहीं बताए गए।
हाईकोर्ट ने भी राज्य की दलील खारिज की
मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की यह दलील स्वीकार नहीं की कि दस्तावेजों में हुई गलती केवल टाइपिंग की त्रुटि थी और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ।
जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह ने कहा कि जब एक जैसी गलती कई आधिकारिक दस्तावेजों में दोहराई गई है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करती है। अदालत ने यह भी पाया कि गिरफ्तारी रिकॉर्ड के कुछ हिस्से मानक प्रारूप से कॉपी किए गए प्रतीत होते हैं, जिनमें आरोपी को सशस्त्र बलों का भगोड़ा बताने जैसा पूरी तरह असंबंधित विवरण भी शामिल था।
हाईकोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि ये दस्तावेज बिना किसी विवेकपूर्ण विचार के तैयार किए गए और इनमें कहीं भी यह नहीं बताया गया कि आरोपी के विरुद्ध वास्तविक आरोप क्या हैं।”
अदालत ने आगे कहा, “यदि गिरफ्तारी के आधार इस प्रकार बताए जाते हैं तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी की ओर से न्यायिक सोच के पूर्ण अभाव को दर्शाता है।”
मामले की पृष्ठभूमि
सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी, दोनों मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले थे। दोनों का विवाह पिछले वर्ष 11 मई को हुआ था और 20 मई को वे मेघालय के सोहरा में हनीमून मनाने गए थे।
तीन दिन बाद दोनों लापता हो गए। इसके बाद 2 जून को 29 वर्षीय राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ।
सोनम रघुवंशी को 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया।
सोनम रघुवंशी लगभग दस महीने तक शिलांग जिला जेल में न्यायिक हिरासत में रहीं, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। अब इस जमानत आदेश को चुनौती देने वाली मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 जुलाई को आगे सुनवाई करेगा।

