मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम की एक सत्र न्यायाधीश को तत्काल पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है। उक्त महिला जज को साल 2022 के एक मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा) मामले में सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद लगातार धमकियां मिल रही थीं।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा को लेकर मीडिया में आई खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह निर्देश जारी किया। इसके साथ ही अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और प्रमुख सचिव (गृह) से इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई पर औपचारिक जवाब मांगा है।
धमकी देने वालों की पहचान और कार्रवाई के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि धमकी देने वाले शरारती तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि इस तरह की धमकी भरी हरकतें सीधे तौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं और न्यायिक अधिकारियों को निडर होकर अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोकती हैं।
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी को सिर्फ इसलिए डराया या धमकाया नहीं जा सकता क्योंकि उसने कोई ऐसा फैसला सुनाया है जो समाज के किसी खास वर्ग को पसंद नहीं आया हो।
क्या था पूरा मामला
सुरक्षा को लेकर यह चिंताएं न्यायाधीश तबस्सुम खान द्वारा गत 12 जून को सुनाए गए एक फैसले के बाद शुरू हुईं। उन्होंने अगस्त 2022 में गो-तस्करी के संदेह में ट्रक चालक शेख लाला नजीर अहमद की पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में पाया था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह सफल रहा कि आरोपियों ने ही इस जानलेवा हमले को अंजाम दिया था। अदालत ने इस घटना को अत्यंत क्रूर और बर्बर करार दिया था।
सजा के ऐलान के तुरंत बाद कोर्ट परिसर के बाहर भारी हंगामा हुआ था, जहां दोषियों के परिजनों ने उन्हें जेल ले जा रहे पुलिस वाहन का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। इसके बाद से ही न्यायाधीश को धमकियां मिलने की खबरें सामने आने लगी थीं।

