लखनऊ के अलीगंज में पिछले महीने हुए दर्दनाक हादसे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और राज्य विद्युत निगम से इस मामले में जवाब तलब किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अलीगंज की एक बहुमंजिला इमारत में लगी इस भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की लखनऊ खंडपीठ ने यह आदेश शिवेंदु पांडेय नामक नागरिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय की है।
अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता शिवेंदु पांडेय ने कोर्ट से आग्रह किया है कि इस हादसे की समयबद्ध और स्वतंत्र जांच कराई जाए। याचिका में मांग की गई है कि जांच प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे, इसके लिए हाईकोर्ट को अपनी निगरानी में एक विशेष समिति का गठन करना चाहिए।
इस याचिका में मामले की जवाबदेही तय करने के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ नगर निगम, एलडीए और राज्य विद्युत निगम समेत अन्य संबंधित विभागों को प्रतिवादी बनाया गया है।
सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल
यह पूरा मामला बीती 22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग से जुड़ा है। इस अग्निकांड पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग को बहुत बड़ा अभियान चलाना पड़ा था, लेकिन तब तक 15 लोगों की जान जा चुकी थी। इस हृदयविदारक हादसे के बाद से ही शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी, आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम की कमियों और नियमों के उल्लंघन को लेकर आम जनता और प्रशासन के बीच गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।

