अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपनी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर केस को तार्किक परिणति तक पहुंचाने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने जांच एजेंसी को अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने को कहा है। इसके साथ ही, अदालत ने एसआईटी से कहा कि वह जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार के लिए विभिन्न याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करे।
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि एसआईटी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के प्रबंधन और उसमें सुधार को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
जुलाई से जारी है न्यायिक प्रक्रिया
इस मामले में न्यायिक सुनवाई की शुरुआत जुलाई महीने में हुई थी। 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस महानिरीक्षक (IGP) किरण एस के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय एसआईटी का संज्ञान लिया था।
तब अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश दिया था और दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी थी।
इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या दान घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन संभव है। वहीं 13 जुलाई को पीठ ने यूपी पुलिस को शुरुआती स्थिति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
राम मंदिर में दान की राशि में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका दायर करने वालों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय खातों की फॉरेंसिक ऑडिट कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

