सरकारी स्कूलों में छात्राओं के शौचालय का मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पुरानी ऐतिहासिक पीठ को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के सरकारी शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के लिए चालू शौचालयों की कमी से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जिसने हाल ही में माहवारी स्वच्छता को मौलिक अधिकार घोषित किया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को इस विषय को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए याचिका को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ के पास भेजने का आदेश दिया।

नीति आयोग की रिपोर्ट और बुनियादी ढांचे की स्थिति

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रीपक कंसल के वकील ने नीति आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, देश भर के 98,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए चालू शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है।

मामले पर विचार करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर 30 जनवरी को ही एक विस्तृत निर्णय के माध्यम से निर्देश दे चुकी है। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को सलाह दी कि वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश का अध्ययन करें। इस पर वकील ने सहमति जताई कि वे पुराने निर्देशों की समीक्षा करने के बाद ही याचिका को आगे बढ़ाने पर निर्णय लेंगे।

माहवारी स्वास्थ्य और मौलिक अधिकार पर ऐतिहासिक निर्णय

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इससे पहले 30 जनवरी को जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. Mahadevan की पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में माना था कि सुरक्षित, प्रभावी और किफायती माहवारी स्वच्छता तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अनिवार्य हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि गरिमापूर्ण वातावरण बनाए बिना अनुच्छेद 21A के तहत प्रदान किया गया शिक्षा का अधिकार वास्तविक रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

फैसले की शुरुआत में अमेरिकी शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता मैलिशा बर्टन का उल्लेख करते हुए जस्टिस पारडीवाला ने टिप्पणी की थी कि माहवारी से किसी वाक्य का अंत होना चाहिए, किसी लड़की की शिक्षा का नहीं।

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स्कूलों के लिए जारी अनिवार्य दिशानिर्देश

लैंगिक न्याय और शैक्षणिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी- सभी श्रेणियों के स्कूलों के लिए कड़े निर्देश जारी किए थे। अदालत ने निर्देश दिया था कि सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग और चालू शौचालय बनाए जाएं, जिनमें पानी की सतत सुविधा उपलब्ध हो।

अदालत ने यह भी अनिवार्य किया था कि शौचालयों में साबुन और पानी के साथ हाथ धोने की व्यवस्था हो, तथा उनका निर्माण और रखरखाव इस तरह किया जाए जिससे गोपनीयता बनी रहे और दिव्यांग बच्चों को भी इस्तेमाल में आसानी हो। इसके अलावा, स्कूलों को छात्राओं को मुफ्त ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने और आपातकालीन सामग्री से लैस माहवारी स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर स्थापित करने का आदेश दिया गया था।

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