दिल्ली हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया है कि POCSO मामले की बाल पीड़िता के लिए ट्रायल जज द्वारा लिखा गया हौसला बढ़ाने वाला पत्र उसे या उसके परिवार को सौंपा जाए। यह पत्र पीड़िता को दी गई मुआवजा राशि के साथ दिया जाएगा।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की डिवीजन बेंच ने 29 सितंबर को दोषी की अपील और सजा निलंबित करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
मामले की घटना 23 जुलाई 2023 की है, जब पीड़िता की उम्र सात साल थी। अब वह करीब 10 साल की है। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का संदेश बच्ची का हौसला बढ़ाने वाला है और DLSA सचिव को निर्देश दिया कि इसे प्रिंट कर दो सप्ताह के भीतर पीड़िता या उसके परिवार को सौंपा जाए।
यह पत्र ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने 20 मई के उस फैसले में लिखा था, जिसमें आरोपी को Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत दोषी ठहराया गया था।
पत्र में बच्ची से कहा गया कि कोर्ट ने उसकी बात सुनी है और उसने जिस साहस के साथ अदालत में आकर उस व्यक्ति की पहचान की, जिसने उसके साथ गलत किया था, और सच बताया, उसे अदालत ने महसूस किया है।
ट्रायल जज ने बच्ची को आगे अपनी जिंदगी जीने, स्कूल जाने, दोस्त बनाने, हंसने, खेलने और सपने देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया। पत्र में कहा गया कि अदालत उसके साहस को हमेशा याद रखेगी।
दोषी को उम्रकैद की सजा
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बच्ची के साथ aggravated penetrative sexual assault और criminal intimidation का दोषी पाया था।
11 जुलाई को उसे कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
ट्रायल कोर्ट ने बच्ची और उसके परिवार को 10.5 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा भी दिया।
सजा निलंबित करने से हाईकोर्ट का इनकार
दोषी की सजा निलंबित करने की मांग पर हाईकोर्ट ने इस स्तर पर राहत देने से इनकार कर दिया।
बेंच ने कहा कि मामले में उपलब्ध सबूतों, जिसमें फॉरेंसिक साक्ष्य भी शामिल हैं, को देखते हुए फिलहाल सजा निलंबित करने का कोई आधार नहीं है।
हाईकोर्ट ने दोषी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं। साथ ही उसे अपने पिछले आपराधिक मामलों की जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को होगी।

