प्रदर्शनों के दौरान आवश्यक सेवाओं में रुकावट पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार, जंतर-मंतर मामले से जोड़ी याचिका

देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान आम आवाजाही बाधित होने और आवश्यक सेवाओं के ठप होने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। बुधवार को पीठ ने इस संबंध में दायर एक नई याचिका पर विचार करने की सहमति व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीर माना। हालांकि, इसके साथ ही अदालत ने यह सवाल भी सामने रखा कि इस तरह की स्थिति से निपटने और समस्या के समाधान के लिए किस प्रकार के न्यायिक निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

आम नागरिक और प्रदर्शनकारी की पहचान का संकट

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले धरना-प्रदर्शनों के कारण स्थानीय निवासियों का आना-जाना बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके अलावा, स्वास्थ्य और राशन जैसी जरूरी सेवाओं की आपूर्ति में भी बाधा आती है। वकील ने यह व्यावहारिक चुनौती भी उठाई कि प्रदर्शन स्थल पर आम नागरिकों और सक्रिय प्रदर्शनकारियों के बीच भेद करना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

जंतर-मंतर से जुड़ी पुरानी याचिका के साथ मामला नत्थी

सुप्रीम कोर्ट ने इस नई अर्जी को पहले से लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ नत्थी कर दिया है। इससे पहले, 3 अगस्त को शीर्ष अदालत ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी।

उस याचिका में दलील दी गई थी कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों के कारण आसपास के निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। साथ ही चिकित्सीय सुविधाओं और जरूरी सामानों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। याचिका में मांग की गई है कि प्रदर्शनों के आयोजन के लिए जंतर-मंतर की जगह किसी वैकल्पिक स्थल की व्यवस्था की जाए।

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