केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तोमिन जे. थचनकरी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उनकी चार साल की जेल की सजा पर फिलहाल रोक लगाने से मना कर दिया है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित करते हुए अभियोजन पक्ष को थचनकरी की अपील पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दो दिन का समय दिया।
यह कानूनी कार्रवाई थचनकरी द्वारा दाखिल उस अपील पर हुई है, जिसमें उन्होंने विजिलेंस कोर्ट द्वारा पिछले गुरुवार को सुनाए गए फैसले को चुनौती दी है। निचली अदालत ने उन्हें आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास और 30.84 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले को बताया गैरकानूनी
हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में पूर्व डीजीपी ने निचली अदालत के आदेश को पूरी तरह अवैध और टिकने अयोग्य बताया है। उन्होंने दलील दी कि यह फैसला केस रिकॉर्ड्स के गलत मूल्यांकन और जांच अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए त्रुटिपूर्ण वित्तीय आंकड़ों पर आंख मूंदकर भरोसा करने की वजह से आया है।
थचनकरी का कहना है कि सुनवाई के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत दर्ज बयान में उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से नकारा था। उन्होंने यह साबित करने के लिए अदालत में एक अतिरिक्त बयान भी पेश किया था कि जांच एजेंसी के हिसाब-किताब में भारी गलतियां हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
जांच का दायरा और अदालत की प्रक्रिया
याचिका के मुताबिक, विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने शुरुआत में 1 जनवरी 2003 से 1 मार्च 2005 के बीच की कथित संपत्ति को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में जांच की इस अवधि को बढ़ाकर 4 जुलाई 2007 तक कर दिया गया। इसी तारीख को जांच अधिकारियों ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर जरूरी दस्तावेज जब्त किए थे।
अंतिम जांच रिपोर्ट दाखिल होने के बाद इस मामले को विभिन्न विजिलेंस अदालतों में स्थानांतरित किया जाता रहा, जिसके बाद वर्ष 2020 में कोट्टायम की विजिलेंस कोर्ट ने इस पर आगे की सुनवाई शुरू की थी।
महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने का आरोप
अपील में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने पहले इस मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए थे, क्योंकि थचनकरी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी वैध आय के कई स्रोतों को जांच में शामिल नहीं किया गया और गणना में भी बुनियादी गलतियां हैं।
हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सरकार के दोबारा जांच वाले आदेश को रद्द कर दिया था कि सरकार ऐसा आदेश नहीं दे सकती। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को यह अनुमति भी दी थी कि वह अतिरिक्त जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल कर सकती है। थचनकरी का आरोप है कि केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस के नियम 19(4) के तहत आवेदन देने के बावजूद जांच एजेंसी ने उन दस्तावेजों को कभी भी ट्रायल कोर्ट के सामने पेश नहीं किया।

