विमान में 10 घंटे फंसे रहे मां और मासूम, नहीं मिला दूध और पानी: उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन पर लगाया 1.5 लाख रुपये का जुर्माना

दिल्ली के उपभोक्ता आयोग ने उड़ान में देरी के दौरान एक महिला और उसके मासूम बेटे को करीब 10 घंटे तक विमान के भीतर बिना भोजन-पानी के रोके रखने के मामले में एक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने एयरलाइन के इस आचरण को सेवा में गंभीर कमी, लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया।

आयोग की अध्यक्ष पूनम चौधरी तथा सदस्य शेखर चंद्रा और बारीक अहमद की पीठ ने 2 सितंबर को यह फैसला सुनाया। पीठ ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह आदेश मिलने के चार सप्ताह के भीतर पीड़िता को 1 लाख रुपये मुआवजे और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करे।

रनवे पर 10 घंटे तक खड़ी रही फ्लाइट, बच्चे के दूध के लिए गर्म पानी तक नहीं दिया

शिकायत के अनुसार, महिला ने साल 2017 में एक ट्रैवल एजेंट के जरिए लॉस एंजिलिस से बीजिंग होते हुए मुंबई तक की बिजनेस क्लास टिकट बुक कराई थी। वापसी की यह उड़ान 19 जुलाई को लॉस एंजिलिस से रवाना होकर अगले दिन मुंबई पहुंचने वाली थी।

लॉस एंजिलिस हवाई अड्डे पर पहुंचने पर महिला को पहले बताया गया कि बोर्डिंग में दो घंटे की देरी है। हालांकि, यात्रियों के सवार होने के बाद भी विमान ने उड़ान नहीं भरी और वह करीब 10 घंटे तक रनवे (टारमैक) पर ही खड़ा रहा।

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महिला का आरोप है कि इस बेहद लंबी देरी के दौरान विमान में सवार यात्रियों को न तो खाना दिया गया और न ही पीने का पानी। हद तो तब हो गई जब महिला के मासूम बेटे के लिए दूध तैयार करने हेतु क्रू सदस्यों ने गर्म पानी देने से भी साफ इनकार कर दिया, जिससे बच्चा कई घंटों तक भूखा-प्यासा तड़पता रहा। इसके बाद एयरलाइन ने उड़ान रद्द करने की घोषणा कर दी। विमान से उतारे जाने के बाद भी मां-बेटे को हवाई अड्डे के टर्मिनल पर बिना किसी आवास, भोजन या एयरलाइन की सहायता के कई और घंटे बिताने पड़े।

खराब मौसम की दलील खारिज, आयोग ने कहा- बुनियादी सुविधाएं देना एयरलाइन का दायित्व

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एयरलाइन ने अपने बचाव में तर्क दिया कि मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के चलते यह उड़ान रद्द हुई थी और उस दिन कई अन्य उड़ानों में भी देरी हुई थी। कंपनी का कहना था कि चूंकि परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर थीं, इसलिए वह यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।

हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन की इस दलील को सिरे से नकार दिया। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई मौसम रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें दिखाया गया था कि उस समय आसमान में केवल बादल छाए थे, दृश्यता (विजिबिलिटी) 4 से 5 किलोमीटर थी और हवा में नमी 70 फीसदी से कम थी। पीठ ने टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान एयरलाइन ऐसा कोई भी पुख्ता सबूत या कारण पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो सके कि मौसम की स्थिति उड़ान रद्द करने लायक थी।

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आयोग ने स्पष्ट रेखांकित किया कि जब भी तकनीकी या अन्य कारणों से यात्रियों को लंबे समय तक विमान के भीतर बैठाकर रखा जाता है, तो उन्हें भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना एयरलाइन का अनिवार्य दायित्व है। यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की अनदेखी करना सेवा में सीधी लापरवाही है।

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