पुलिस थानों में CCTV: फंड के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 6 मई को बुलाई उच्च स्तरीय बैठक

देश भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए फंड के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) को निर्देश दिया है कि वे 6 मई को केंद्र और सभी राज्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करें।

अदालत ने यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए 2018 में दिए गए अपने आदेश के पालन में हो रही देरी और फंड के सही इस्तेमाल पर उठ रहे सवालों के बाद उठाया है।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि राज्यों को CCTV लगाने के लिए जो पैसा दिया गया, उसका क्या हुआ। सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे ने बेंच को बताया कि केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत और पहाड़ी राज्यों को 90 प्रतिशत फंड देती है। बाकी राज्यों के लिए केंद्र 60 प्रतिशत हिस्सा देता है, जबकि 40 प्रतिशत खर्च संबंधित राज्य सरकार को उठाना होता है।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज की, अंकित शर्मा की हत्या को बताया 'गंभीर साज़िश' का हिस्सा

सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट रूप से पूछा, “हम फंड के उपयोग पर केवल राज्यों से जवाब क्यों नहीं लेते?” कोर्ट ने साफ किया कि अब जवाबदेही तय करने का समय आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 6 मई की बैठक में केंद्र के गृह सचिव या उनके द्वारा नामित (कम से कम संयुक्त या अतिरिक्त सचिव रैंक के) अधिकारी और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव अनिवार्य रूप से शामिल हों।

एमिकस क्यूरी को इस चर्चा के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को सौंपनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 मई को तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में पारदर्शिता लाने के लिए कुछ बेहद कड़े मानक तय किए हैं:

  • कवरेज: थाने के एंट्री-एग्जिट पॉइंट, मुख्य गेट, लॉक-अप, गलियारे, लॉबी और रिसेप्शन समेत उन सभी जगहों पर कैमरे होने चाहिए जहां कोई गतिविधि होती है।
  • तकनीकी मानक: कैमरों में नाइट विजन की सुविधा होनी चाहिए और वे ऑडियो व वीडियो दोनों रिकॉर्ड करने में सक्षम होने चाहिए।
  • डेटा स्टोरेज: केंद्र और राज्यों के लिए ऐसे सिस्टम खरीदना अनिवार्य है जो कम से कम एक साल तक का डेटा सुरक्षित रख सकें।
READ ALSO  मां द्वारा बच्चों में पिता के प्रति शत्रुता जगाना क्रूरता, तलाक का वैध आधार: दिल्ली हाईकोर्ट

उल्लेखनीय है कि 2020 में कोर्ट ने इस दायरे को बढ़ाते हुए सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एनआईए (NIA) जैसी जांच एजेंसियों के दफ्तरों में भी CCTV और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का आदेश दिया था। हाल ही में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि तकनीकी और कार्यान्वयन संबंधी सभी मुद्दों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles