दिल्ली इमारत हादसा: अवैध निर्माणों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एमिकस क्यूरी, समयबद्ध सीलिंग और ध्वस्तीकरण की मांग

दिल्ली के सादुलाजाब इलाके में एक अवैध पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद यह गंभीर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी अवैध ढांचों की समयबद्ध पहचान करने, उन्हें सील करने और गिराने की मांग की है। इसके साथ ही, इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की गुहार लगाई गई है।

लापरवाही और नियमों की अनदेखी पर तीखे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा ने अधिवक्ता गोविंद जी के माध्यम से 4 जून को सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। इस रिपोर्ट में एमसीडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद निगम अवैध निर्माणों को रोकने में नाकाम रहा, जो उसके वैधानिक कर्तव्यों का खुला उल्लंघन है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह एमसीडी को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दे। इस हलफनामे में दिल्ली के सभी वार्डों में हुए अवैध निर्माणों, आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा होना चाहिए। इसके अलावा, एमिकस क्यूरी ने दिल्ली की सभी संपत्तियों का तुरंत ढांचागत ऑडिट (स्ट्रक्चरल ऑडिट) कराने और खतरनाक व अवैध घोषित की गई इमारतों को एक तय समय सीमा के भीतर सील कर गिराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है।

हादसे वाली इमारत का विवादित इतिहास

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सादुलाजाब के वेस्टर्न मार्ग स्थित प्लॉट नंबर 261 पर बनी जिस पांच मंजिला इमारत के गिरने से यह बड़ा हादसा हुआ, उसका इतिहास नियमों के उल्लंघन से भरा रहा है। एमसीडी के दस्तावेजों के हवाले से स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस इमारत को पहली बार साल 2012 में अवैध निर्माण के लिए बुक किया गया था। इसके बाद साल 2015 में अतिरिक्त मंजिलें बनाने पर दोबारा कार्रवाई दर्ज की गई थी।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन सभी औपचारिक कागजी कार्रवाइयों के बावजूद, जमीन पर कोई ठोस एक्शन या सीलिंग नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि बिल्डर बेखौफ होकर अवैध निर्माण कराता रहा और 30 मई को पूरी इमारत ढहने से ठीक पहले इसकी चौथी और पांचवीं मंजिल भी तैयार कर ली गई। इस हादसे में 6 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि कम से कम 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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अधिकारियों की मिलीभगत और मुआवजे की मांग

याचिका में एमसीडी से यह स्पष्टीकरण भी मांगा गया है कि इस अवैध पांच मंजिला इमारत का निर्माण आखिर किसकी शह पर जारी रहा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या विभागीय या कानूनी कार्रवाई की गई है।

अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत से अपील की है कि दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को एक संयुक्त ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) सौंपने का निर्देश दिया जाए, जो इस पूरे मामले में नगर निगम के अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच करे। इसके साथ ही, दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह एक हलफनामा दाखिल कर बताए कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए उसकी क्या योजना है।

पूरे देश में अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

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यह याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले व्यक्त की गई चिंताओं की कड़ी में आई है। इससे पहले, बीती 25 मार्च को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान देश भर में बढ़ रहे अवैध निर्माणों और स्थानीय निकायों की विफलता पर बेहद सख्त रुख अपनाया था।

उस समय शीर्ष अदालत ने आवासीय संपत्तियों के अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल और बिना अनुमति भूमि-उपयोग परिवर्तन के मामलों की देशव्यापी जांच के आदेश दिए थे। एमिकस क्यूरी की नई रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि दिल्ली का यह हालिया दर्दनाक हादसा इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि इन नियमों को बिना किसी देरी के तुरंत और सख्ती से जमीन पर लागू करने की कितनी जरूरत है।

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