केरल वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सरकारी अधिकारी की निगरानी का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने केरल राज्य वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक कामकाज पर राज्य सरकार के संयुक्त सचिव की निगरानी से संबंधित निर्देश को हटा दिया है। मंगलवार को दिए अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए बोर्ड की प्रशासनिक स्वायत्तता को बहाल कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह शर्त बरकरार रखी है कि बोर्ड हाईकोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय या पूंजीगत खर्च नहीं कर सकेगा।

मुख्य पीठ का फैसला और हाईकोर्ट को निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में दायर अपीलों का निपटारा किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के संयुक्त सचिव, जो वक्फ मामलों के प्रभारी हैं, बोर्ड के एक नियमित सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे, लेकिन उनके पास बोर्ड के कामकाज की देखरेख का अधिकार नहीं होगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह सभी पक्षों को अपने दावे और प्रति-दावे प्रस्तुत करने का उचित अवसर देते हुए इस मामले का शीघ्र निस्तारण करे।

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की पृष्ठभूमि

यह कानूनी विवाद केरल हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं के एक समूह से जुड़ा है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राज्य वक्फ बोर्ड यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का पालन नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें कानून के अनुसार दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं हैं।

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इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने 15 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत बोर्ड पर अदालत की पूर्व अनुमति के बिना बड़े नीतिगत निर्णय लेने या पूंजीगत खर्च करने पर रोक लगा दी गई थी, और साथ ही इसका प्रशासन वक्फ मामलों के संयुक्त सचिव की देखरेख में सौंप दिया गया था।

अदालत में पक्षों की दलीलें और टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि याचिका की प्रतियां बोर्ड के सदस्यों को तामील कराए बिना ही ऐसा आदेश जारी कर दिया गया। अहमदी ने यह आरोप भी लगाया कि केरल सरकार याचिकाकर्ताओं का समर्थन कर रही है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस बात पर सवाल उठाया कि केवल सदस्यता के गठन से जुड़े विवाद को लेकर पूरे बोर्ड के कामकाज को रोकना कितना उचित है। वहीं, केरल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने पीठ को सूचित किया कि यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए पहले से सूचीबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब मूल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।

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