कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कोडागु जिले में एक 33 वर्षीय अमेरिकी नागरिक के साथ हुए कथित बलात्कार के मामले में अब तक की जांच से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने सोमवार को अतिरिक्त राज्य लोक अभियोजक बी एन जगदीश को निर्देश दिया कि वे जांच के सभी कागजात हासिल कर उन्हें बुधवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी। यह निर्देश एक होमस्टे मालिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट का तुरंत रोक लगाने से इनकार
इस मामले में होमस्टे मालिक को 22 अप्रैल को उसके यहां काम करने वाले एक कर्मचारी के साथ गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अंगद कामथ ने दलील दी कि यह मामला उनके मुवक्किल के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इसके जवाब में जस्टिस नागप्रसन्ना ने स्पष्ट किया कि वह जांच के दस्तावेजों को देखे बिना इस मामले पर सीधे तौर पर कोई अंतरिम रोक जारी नहीं कर सकते।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागप्रसन्ना ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि किसी विदेशी नागरिक के साथ देश में बलात्कार होना बेहद गंभीर अपराध है।
गिरफ्तारी को चुनौती और पीड़िता के संदेशों का हवाला
बचाव पक्ष के वकील कामथ ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल ने अपनी गिरफ्तारी की कानूनी वैधता को चुनौती दी है और गलत तरीके से की गई इस गिरफ्तारी के लिए 15 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिकायत में होमस्टे मालिक पर खुद बलात्कार करने का कोई आरोप नहीं है, बल्कि उन पर केवल इस मामले को दबाने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 180 के तहत पुलिस को दिए गए पीड़िता के बयान में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि उसने होमस्टे मालिक को इस कथित घटना की कोई जानकारी दी थी।
बचाव पक्ष ने पुलिस के दावों को खारिज करने के लिए घटना के बाद पीड़िता की ओर से की गई गतिविधियों का ब्योरा पेश किया। याचिका के अनुसार, कथित घटना के महज 17 मिनट बाद अमेरिकी पर्यटक ने होमस्टे मालिक को व्हाट्सएप पर एक दोस्ताना संदेश भेजा था, जिसमें उसने इमोजी का इस्तेमाल करते हुए वाई-फाई कनेक्टिविटी के लिए धन्यवाद दिया था।
इसके अगले दिन सुबह, महिला ने अपने माता-पिता, बहन, बॉयफ्रेंड और नियोक्ता सहित सात लोगों को एक लंबा ईमेल भेजा, जिसमें इस कथित घटना का कोई उल्लेख नहीं था। उसी दिन उसने याचिकाकर्ता की मां और पत्नी के साथ पोनम्पेट स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की यात्रा की, जहां उसने परिवार के एक व्यावसायिक सहयोगी से मुलाकात की और उनका गर्मजोशी से अभिवादन किया। घटना के तीन दिन बाद, वह एक ड्राइवर के साथ बायलाकुप्पे के स्वर्ण मंदिर और एक हाथी शिविर की सैर पर भी गई थी, जहां उसने कई तस्वीरें और वीडियो बनाए थे।
अपराध छुपाने और बंधक बनाने के आरोप
दूसरी तरफ, पुलिस का इस मामले में अलग दावा है। पुलिस का आरोप है कि होमस्टे मालिक ने अमेरिकी पर्यटक को जबरन अपने यहां रोके रखा, उसे पुलिस से संपर्क न करने की हिदायत दी और दूसरों से बातचीत करने से रोका।
इसके जवाब में याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस का यह आरोप पहले से ही यह मानकर चल रहा है कि उसे घटना की जानकारी थी, जबकि पीड़िता के अपने बयानों और रिकॉर्ड से इस बात का पूरी तरह खंडन होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 12 अप्रैल का है, जब झारखंड के रहने वाले 45 वर्षीय रिसॉर्ट कर्मचारी ने कथित तौर पर इस पर्यटक की ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ बलात्कार किया था। अकेले यात्रा कर रही यह पर्यटक होमस्टे से मैसूर चली गई और वहां से देश छोड़ने के बाद अप्रैल के तीसरे हफ्ते में अमेरिकी दूतावास को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कर्नाटक पुलिस हरकत में आई और 22 अप्रैल को रिसॉर्ट कर्मचारी और होमस्टे मालिक दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
होमस्टे मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कथित अपराध छुपाने, झूठी सूचना देने और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है।
इससे पहले, स्थानीय जिला अदालत ने 2 मई को होमस्टे मालिक को जमानत दे दी थी, जबकि 4 जून को 45 वर्षीय आरोपी रिसॉर्ट कर्मचारी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

