कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए बनर्जी को मिली अंतरिम राहत को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इस आदेश के तहत पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगी।
जस्टिस कौशिक चंदा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग जारी रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसी सीआईडी (CID) को उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने से कम से कम 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।
क्या है कथित जालसाजी का पूरा मामला
यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन के लिए पार्टी के एक प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है। टीएमसी के दो बागी विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा सचिवालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों विधायकों का आरोप था कि बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करने वाले पार्टी के प्रस्ताव पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।
इस शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता पुलिस में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य के गृह सचिव ने बाद में इस केस की जांच राज्य की सीआईडी को सौंप दी थी।
पूर्व अदालती आदेश और पूछताछ की स्थिति
हाईकोर्ट ने सबसे पहले 11 जून को अभिषेक बनर्जी को इस मामले में तीन सप्ताह की सशर्त अंतरिम राहत दी थी, जिसे बाद में दो और हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया था। इसी अदालती निर्देश का पालन करते हुए बनर्जी 11 जून को कोलकाता स्थित सीआईडी मुख्यालय ‘भवानी भवन’ में पूछताछ के लिए उपस्थित हुए थे।
अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने बताया कि जून में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से पहले सीआईडी ने सांसद को तीन बार समन जारी किया था। हालांकि, विभिन्न कारणों का हवाला देकर बनर्जी उन तारीखों पर पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे।

