इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: CLAT-UG 2026 की मेरिट लिस्ट दोबारा जारी करने का निर्देश, पहले दौर में दाखिला लेने वाले छात्रों पर असर नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT-UG) 2026 की मेरिट लिस्ट को संशोधित कर एक माह के भीतर दोबारा प्रकाशित करने का आदेश दिया है। यह निर्देश एक उत्तर कुंजी विवाद पर दिया गया है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहले दौर की काउंसलिंग में दाखिला ले चुके छात्रों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक सारन ने अवनीश गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिन्होंने CLAT-UG परीक्षा की उत्तर कुंजी में कुछ सवालों को लेकर आपत्ति जताई थी।

CLAT-UG 2026 परीक्षा 7 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई थी। याचिकाकर्ता ने टेस्ट बुकलेट-C के प्रश्न संख्या 6, 9 और 13 (मास्टर बुकलेट-A के क्रमशः प्रश्न 88, 91 और 95) की उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी।

अवनीश गुप्ता का आरोप था कि Oversight Committee ने विषय विशेषज्ञों की राय को दरकिनार करते हुए एक प्रश्न को लेकर निर्णय लिया, और इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया।

कोर्ट ने प्रश्न संख्या 6 और 13 में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, लेकिन लॉजिकल रीजनिंग से संबंधित प्रश्न संख्या 9 को लेकर याचिकाकर्ता की आपत्ति को उचित माना।

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कोर्ट ने कहा कि उस प्रश्न में विकल्प ‘B’ और ‘D’ दोनों को सही उत्तर माना जाना चाहिए।

“इस परिप्रेक्ष्य में उत्तरदाता/नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ का कंसोर्टियम निर्देशित किया जाता है कि वह बुकलेट-C के प्रश्न संख्या 9 (मास्टर बुकलेट-A के प्रश्न संख्या 91) और अन्य बुकलेट्स में उसके समकक्ष प्रश्नों के लिए ‘B’ और ‘D’ दोनों विकल्पों को सही मानते हुए अंक प्रदान कर मेरिट लिस्ट को संशोधित करे,” कोर्ट ने कहा।

कोर्ट ने कंसोर्टियम को एक माह के भीतर संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार कर दोबारा प्रकाशित/अधिसूचित करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले दौर की काउंसलिंग के बाद दाखिला ले चुके छात्रों पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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“चूंकि बार में यह बताया गया है कि पहले दौर की काउंसलिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, अतः इस दौर के आधार पर दाखिला ले चुके छात्रों/उम्मीदवारों की स्थिति को प्रभावित नहीं किया जाएगा। हालांकि, आगे की काउंसलिंग संशोधित/दोबारा अधिसूचित मेरिट लिस्ट के आधार पर ही की जाए,” कोर्ट ने कहा।

इस निर्णय से आगामी काउंसलिंग राउंड्स में बदलाव आ सकता है और वे उम्मीदवार लाभान्वित हो सकते हैं जो पहले मेरिट लिस्ट में विवादित उत्तरों के कारण पीछे रह गए थे।

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