सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नीट (NEET) परीक्षा विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति (HPEC) महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों की जांच प्राथमिकता के आधार पर करेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी और बताया कि समिति को इन शिकायतों पर तत्काल अंतरिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
यौन उत्पीड़न के आरोपों पर प्राथमिकता से कार्रवाई के निर्देश
अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ हुई यौन उत्पीड़न और बदसलूकी की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आए विवरणों का हवाला देते हुए बताया कि एक महिला प्रदर्शनकारी पर पुलिसकर्मी द्वारा लाठी से बर्बरता करने का गंभीर आरोप भी शामिल है।
अधिवक्ता गुप्ता ने मांग की कि इन मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायतें सीधे जांच समिति तक पहुंचा सकें, इसके लिए एक समर्पित ईमेल आईडी और किसी नोडल अधिकारी या जिला जज की नियुक्ति की जानी चाहिए। साथ ही, इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि सभी पीड़ित बेझिझक अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
अदालत का रुख और स्वतंत्र याचिका
पीठ की अगुआई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत पिछले सप्ताह ही समिति को यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता पर रखते हुए जांच करने और जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध कर चुकी है। वहीं, पीठ के सदस्य जस्टिस जोयमाल्या बागची ने जोड़ा कि इसी मुद्दे पर एक स्वतंत्र रिट याचिका भी दाखिल की गई थी, जिसे समीक्षा के लिए जांच पैनल को सौंप दिया गया है।
उच्च-स्तरीय जांच समिति का ढांचा और अधिकार क्षेत्र
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त को पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में इस पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी एल आर बिश्नोई शामिल हैं।
यह समिति दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा किए गए अत्यधिक बल प्रयोग—जैसे पेलेट गन के इस्तेमाल—की जांच कर रही है। इसके अलावा, समिति प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस और सुरक्षाकर्मियों पर की गई हिंसा की घटनाओं की भी पड़ताल करेगी।
नीट आंदोलन और प्रदर्शन का घटनाक्रम
यह मामला नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन से जुड़ा है। 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुए इस आंदोलन की मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। व्यापक विरोध के बाद, 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ।

