सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जाली और फर्जी मेडिकल डिग्रियों की जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई एक जनहित याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही अदालत ने हर हफ्ते जनहित याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें नियमित तौर पर ऐसे मामलों से अदालत पर बोझ न डालने की हिदायत दी।
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से पेश की गई इस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।
याचिकाओं की फैक्टरी चलाने पर पीठ की नाराजगी
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के तौर-तरीकों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वकील ने हर हफ्ते रिट याचिका दाखिल करने की मानो एक फैक्टरी बना रखी है। पीठ ने सवाल किया कि वे किस तरह की याचिकाएं तैयार करते हैं और समाचार देखते ही तुरंत ड्राफ्टिंग शुरू कर देते हैं। अदालत ने पूछा कि क्या ऐसी याचिकाएं केवल प्रचार और लोकप्रियता हासिल करने के लिए लगाई जाती हैं। इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह नियमित रूप से याचिकाओं का अंबार अदालत के सामने न लगाया जाए।
नियमों के ऑडिट और विशेषज्ञ समिति की थी मांग
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने अपनी याचिका के जरिए मेडिकल क्षेत्र के नियमों और विनियमों के व्यापक ऑडिट कराने के निर्देश देने की मांग की थी। इसके अलावा याचिका में फर्जी व जाली मेडिकल डिग्रियों के पूरे मामले की पड़ताल के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन की भी गुहार लगाई गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

