पीयरलेस शेयर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की भगवती डेवलपर्स की याचिका, साढ़े तीन दशक पुरानी कानूनी लड़ाई खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के शेयर लेनदेन से जुड़े विवाद में भगवती डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (BDPL) की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही देश के सबसे लंबे समय तक चले कॉरपोरेट विवादों में से एक का औपचारिक पटाक्षेप हो गया।

जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के 16 अप्रैल 2026 के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। एनसीएलएटी ने अपने आदेश में पीयरलेस द्वारा 1980 के दशक के उत्तरार्ध में किए गए शेयर आवंटन और हस्तांतरण को वैध ठहराया था।

शीर्ष अदालत में पीयरलेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश हुए, जिन्हें अधिवक्ता अरुनाभ देब और आशिका डागा ने सहयोग दिया। वहीं, भगवती डेवलपर्स का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने रखा, जिनकी सहायता अधिवक्ता फराज अनीस ने की।

1980 के दशक के शेयर सौदों से शुरू हुआ था विवाद

यह विवाद मूल रूप से वर्ष 1991 में शुरू हुआ था, जब कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 397 और 398 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। इस याचिका में पीयरलेस द्वारा वित्त वर्ष 1987-88 के दौरान लिए गए कॉरपोरेट फैसलों को चुनौती दी गई थी।

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विवाद का मुख्य केंद्र पीयरलेस द्वारा प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किए गए 30,000 इक्विटी शेयर और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 15,626 शेयरों का हस्तांतरण था। कंपनी के निदेशक मंडल और शेयरधारकों ने इस प्राइवेट प्लेसमेंट को मंजूरी दी थी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि इन सौदों का मकसद कंपनी के प्रबंधन नियंत्रण को बदलना था और इसमें कंपनी के पैसों की अनुचित हेराफेरी की गई थी।

मामले के मूल याचिकाकर्ताओं ने बाद में केस वापस लेने की अर्जी दी थी, जिसके बाद अदालत ने भगवती डेवलपर्स को याचिकाकर्ता के तौर पर इस मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी थी।

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ट्रिब्यूनल से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी प्रक्रिया

यह मुकदमा तीन दशकों से अधिक समय तक कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न चरणों से गुजरता हुआ अंततः नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) पहुंचा।

एनसीएलटी ने लेन-देन के 30 साल से भी अधिक समय बाद, 18 जुलाई 2022 को याचिका स्वीकार करते हुए शेयरधारकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। पीयरलेस ने इस निर्णय को एनसीएलएटी में चुनौती दी।

एनसीएलएटी ने 16 अप्रैल 2026 को एनसीएलटी के आदेश को पलटते हुए पीयरलेस की अपील स्वीकार कर ली। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कंपनी के पुराने रिकॉर्ड्स और तत्कालीन दस्तावेजों की समीक्षा के बाद वित्तीय अनियमितता के सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कंपनी के फैसलों व शेयर सौदों को वैध करार दिया। इसके बाद भगवती डेवलपर्स ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

शुरुआत से ही पीयरलेस का रुख रहा है कि सभी लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी थे, जरूरी कॉरपोरेट मंजूरियों के साथ किए गए थे और कंपनी के व्यावसायिक हितों के अनुकूल थे।

प्रबंधन ने बताया नए दौर की शुरुआत

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जयंत रॉय ने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय बाद आया यह फैसला कंपनी के इतिहास के एक लंबे अध्याय का सुखद अंत करता है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि संस्था के सर्वोत्तम हित और नेकनीयती से लिए गए निर्णयों की वैधता को अदालत ने पूरी तरह सही माना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक लंबी कानूनी लड़ाई का अंत भर नहीं है, बल्कि यह पीयरलेस को अब पूरे ध्यान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है।

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