लिव-इन पार्टनर की हत्या और गुपचुप अंतिम संस्कार के आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी लिव-इन पार्टनर की कथित तौर पर हत्या करने और उसके परिजनों को बताए बिना शव का अंतिम संस्कार करने के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी को राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

3 सितंबर को आदेश सुनाते हुए जस्टिस मधु जैन ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से पहली नज़र में यह संकेत मिलता है कि आरोपी न केवल महिला की मौत का ज़िम्मेदार है, बल्कि उसने मृतका के परिजनों को गुमराह किया और पुलिस को भी गलत जानकारी दी। अदालत ने रेखांकित किया कि आरोपी के इस आचरण के कारण ही मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने में देरी हुई। अपराध की गंभीरता और लगे आरोपों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

बिना पोस्टमार्टम और परिजनों की सूचना के किया अंतिम संस्कार

READ ALSO  समीर वानखेड़े ने Netflix की सीरीज़ ‘The Ba**ds of Bollywood’* पर मानहानि का मुकदमा दायर किया, 2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता मई 2021 से आरोपी के साथ लिव-इन में रह रही थी। 14 और 15 अप्रैल 2022 की दरमियानी रात उसकी मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद 15 अप्रैल 2022 को आरोपी ने मृतका के मायके वालों को कोई सूचना दिए बिना और शव का मेडिकल परीक्षण या पोस्टमार्टम कराए बिना ही निगमबोध घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

बाद में मृतका के पिता की शिकायत पर फर्श बाजार थाने में हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को 22 अप्रैल 2022 को गिरफ्तार कर लिया था।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

जमानत की मांग करते हुए आरोपी ने दलील दी कि वह चार साल से जेल में बंद है और मुकदमे की प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। उसके वकील ने कहा कि मामले में सूचीबद्ध 26 गवाहों में से अब तक केवल चार गवाहों के बयान ही दर्ज हो सके हैं। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि आरोपी ने महिला के परिवार को उसकी मौत की जानकारी दी थी और अंतिम संस्कार किसी सुनसान जगह के बजाय सार्वजनिक निगमबोध घाट पर किया गया था। वकील का यह भी कहना था कि मौत से एक दिन पहले आरोपी महिला को डॉक्टर के पास भी ले गया था।

READ ALSO  केवल उचित स्टाम्प ड्यूटी का अभाव वाद को तत्काल खारिज करने का आधार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अभियोजन ने अदालत को बताया कि आरोपी ने महिला के परिवार को उसकी मौत की सूचना नहीं दी और उलटा उन्हें यह कहकर गुमराह किया कि वह घर छोड़कर कहीं चली गई है। सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि आरोपी ने श्मशान घाट पर भी गलत जानकारी दर्ज कराई और दावा किया कि महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है, जबकि उसने न तो महिला को किसी डॉक्टर को दिखाया था और न ही घर पर किसी चिकित्सक को बुलाया था। अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपी पुलिस को सूचना दिए बिना और बिना किसी चिकित्सीय जांच के सीधे शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गया, जिससे पोस्टमार्टम नहीं हो सका।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles