छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की जमानत के खिलाफ याचिकाएं खारिज, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत को बरकरार रखा है। बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले की जांच कर रही राज्य पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) के खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा की गई तल्ख टिप्पणियों को हटा दिया है।

हाईकोर्ट का फैसला और समानता का सिद्धांत

इससे पहले 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग और राज्य भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (एसीबी)/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज दोनों मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत दे दी थी।

ईडी के मामले में आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने रेखांकित किया था कि चैतन्य बघेल की भूमिका उन मुख्य आरोपियों की तुलना में काफी कम है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। अदालत का कहना था कि मामले के मुख्य आरोपी और कथित प्रमुख लाभार्थी—अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों—जमानत पर बाहर हैं। ऐसे में चैतन्य बघेल को जमानत देने से इनकार करना समानता के स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि ईडी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य मुख्य रूप से वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों पर आधारित हैं। इन साक्ष्यों की सत्यता का परीक्षण मुकदमे (ट्रायल) के दौरान होना चाहिए, न कि जमानत तय करने के चरण में।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने मामलों को संदेह से परे साबित करने के अभियोजन के कर्तव्य पर जोर दिया

दलीलों की बहस और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि चैतन्य बघेल इस पूरे मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं और प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। वहीं, चैतन्य बघेल के वकील ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने दो साल से जारी जांच के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एक संतुलित और तार्किक फैसला सुनाया है।

इसके अलावा, राज्य पुलिस की ईओडब्ल्यू/एसीबी जांच से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने प्रक्रियागत चूक पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि विशेष अदालत द्वारा स्थायी/खुला वारंट जारी किए जाने के बावजूद जांच अधिकारी द्वारा मामले के एक अन्य आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न करना कानून का गंभीर उल्लंघन है।

मामले के घटनाक्रम के अनुसार, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में चैतन्य बघेल को पिछले साल 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद, जब वे जेल में बंद थे, तब एसीबी/ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार के मामले में 24 सितंबर को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट में महिला जज की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम में नही बन रही सहमति, जाने कहाँ आ रही अड़चने।
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles