कोयला घोटाले में ईडी जांच में कथित हस्तक्षेप मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 10 फरवरी तक टाली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका की सुनवाई 10 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोलकाता स्थित आई-पैक (I-PAC) कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर की गई तलाशी में कथित रूप से बाधा डालने का आरोप लगाया है। यह तलाशी करोड़ों रुपये के कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एन वी अंजनिया की पीठ ने यह फैसला सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस दलील के बाद लिया, जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मामले में हलफनामे दाखिल किए हैं और उन्हें पढ़ने के लिए समय चाहिए।

ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 8 जनवरी को जब एजेंसी ने आई-पैक के ठिकानों पर छापेमारी की, उस वक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ टीएमसी नेताओं के साथ वहां पहुंचीं, ईडी अधिकारियों से बहस की और वहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने साथ ले गईं।

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ईडी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति से अधिकारियों पर डर का माहौल बना और इससे एजेंसी की स्वतंत्र रूप से वैधानिक कर्तव्यों को निभाने की क्षमता प्रभावित हुई।

15 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने राज्य की शीर्ष कार्यकारी द्वारा केंद्रीय एजेंसी की जांच में कथित हस्तक्षेप को “बहुत गंभीर” बताया था। अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।

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साथ ही, अदालत ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगाई थी और छापे की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश भी राज्य पुलिस को दिया था।

तृणमूल कांग्रेस ने ईडी के सभी आरोपों को खारिज किया है और दावा किया है कि आई-पैक पर की गई कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करना था।

टीएमसी ने कहा कि आई-पैक पार्टी का चुनावी रणनीतिकार है और यह छापेमारी निष्पक्ष जांच के बजाय आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक व्यवधान पैदा करने के उद्देश्य से की गई थी।

ईडी द्वारा की जा रही यह जांच ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है, जिसमें राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के आरोप हैं।

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चुनाव से कुछ ही महीने पहले इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच टकराव की एक नई लकीर खींच दी है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 10 फरवरी को होगी।

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