अदालतों में न्याय की नींव है निष्पक्ष पुलिस जांच: सीजेआई सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि देश की न्याय व्यवस्था में पुलिस और अदालतों की भूमिका एक निरंतर चलने वाली साझी कड़ी के समान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में पूरी सावधानी के साथ दर्ज की गई एफआईआर और निष्पक्षता से की गई जांच ही अदालत में न्याय मिलने की संभावना को मजबूत बनाती है।

बुधवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी ओ.पी. मिश्रा की पुस्तक “बियॉन्ड द यूनिफॉर्म: ड्यूटी, डिस्क्रिशन एंड पब्लिक ट्रस्ट” के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि जांच प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही कोई खामी या पक्षपात रह जाए, तो अदालत चाहे कितनी भी सजग और कर्तव्यनिष्ठ क्यों न हो, उस बुनियादी नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर सकती। उन्होंने रेखांकित किया कि पुलिस जो सामग्री और साक्ष्य सामने रखती है, अदालतें उसी आधार पर आगे की न्यायिक कार्यवाही संचालित करती हैं।

इस अवसर पर दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने भी अपने विचार रखे।

अधिकार पद का आभूषण नहीं, जनता की दी हुई अमानत

सीजेआई सूर्यकांत ने पुलिसकर्मियों के दायित्वों पर चर्चा करते हुए कहा कि उनका कर्तव्य केवल कानून के शाब्दिक अर्थों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें उस मूल उद्देश्य के प्रति भी निष्ठावान रहना होगा जिसके तहत उन्हें यह शक्ति दी गई है।

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उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपराध की जांच करने, किसी को गिरफ्तार करने, आवागमन को नियंत्रित करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति पुलिस पद का कोई आभूषण या अपने आप में कोई अंतिम साध्य नहीं है। यह अधिकार वास्तव में आम जनता की ओर से पुलिस को सौंपी गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और अमानत है।

संकट बनने से पहले स्थिति संभालना ही उत्कृष्ट पुलिसिंग

निवारक पुलिस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल अपराध घटित होने, अनियंत्रित भीड़ जुटने या आपात स्थिति पैदा होने के बाद ही आरंभ नहीं होता। वास्तविक पुलिसिंग इससे कहीं पहले शुरू होती है—जिसमें अग्रिम तैयारी, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, संवेदनशील बिंदुओं की पहचान और किसी भी संकट से निपटने के लिए कानूनी तंत्र को पहले से मुस्तैद रखना शामिल है। उन्होंने कहा कि किसी भी कठिन परिस्थिति को गंभीर संकट में तब्दील होने से पहले ही रोक लेना ही पुलिस का सबसे उत्कृष्ट कार्य है।

इस संदर्भ में उन्होंने 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के शांतिपूर्ण और सुचारु आयोजन के लिए पुलिस बल के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के पीछे पुलिसकर्मियों का असाधारण श्रम होता है, जो चौबीसों घंटे सतर्कता बरतते हुए मार्गों और आयोजन स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, यातायात का समन्वय करते हैं और अतिथियों के ठहरने के स्थानों की सुरक्षा संभालते हैं।

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बेहतर कार्य परिस्थितियां और संस्थागत सुधार आवश्यक

सीजेआई ने पुलिसकर्मियों के कल्याण और कार्यदशाओं पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने पुलिसकर्मियों से हर समय साहस, संयम और संवेदनशीलता की उम्मीद करता है, तो समाज और शासन का भी यह दायित्व है कि उन्हें ऐसा अनुकूल वातावरण दे जहाँ ये गुण पनप सकें।

उन्होंने जोर दिया कि पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण, आधुनिक जांच संसाधन, जिम्मेदार नेतृत्व, काम के मानवीय घंटे तथा उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये बुनियादी जरूरतें जनहितैषी पुलिसिंग से अलग नहीं हैं, बल्कि उसी की अनिवार्य आधारशिला हैं।

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