दहेज रासायनिक हादसा: 3.27 करोड़ रुपये के मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट को पीड़ितों की पहचान करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के दहेज में भारत रसायन लिमिटेड के कीटनाशक संयंत्र में 2022 में हुए भीषण औद्योगिक हादसे के पीड़ितों और उनके परिजनों की पहचान के लिए गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेकर मामला दर्ज करने को कहा है, ताकि मुआवजे का वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब अदालत को बताया गया कि प्रशासनिक अधिकारी अब तक प्रभावित लोगों या उनके कानूनी वारिसों की पहचान करने में सफल नहीं हो सके हैं। पीड़ितों को दिए जाने के लिए लगभग 3.27 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा है।

रजिस्ट्री में जमा राशि एक साल के लिए रहेगी एफडी में

मुआवजा राशि को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि 3.27 करोड़ रुपये की इस राशि को एक और साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में रख दिया जाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि जैसे ही हाईकोर्ट लाभार्थियों और उनके आश्रितों की पहचान का काम पूरा कर लेगा, यह धनराशि वितरण के लिए जारी कर दी जाएगी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस याचिका का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया।

रिएक्टर में कथित खराबी से हुआ था जानलेवा धमाका

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यह पूरा मामला 17 मई 2022 को गुजरात के दहेज स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत रसायन लिमिटेड के कीटनाशक विनिर्माण संयंत्र में हुए एक बड़े औद्योगिक हादसे से जुड़ा है। संयंत्र के रिएक्टर में कथित तकनीकी खराबी की वजह से भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई। इस हादसे में आठ कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के चलते आसपास के इलाके में जहरीली गैस के रिसाव और रासायनिक प्रदूषण को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं।

पर्यावरण बहाली पर खर्च होंगे 13.5 करोड़ रुपये

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हादसे के बाद ‘प्रदूषक भुगतान करे’ (पॉल्यूटर पेज़) सिद्धांत लागू करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 29 मई 2024 को कंपनी पर लगभग 13.5 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था। एनजीटी ने निर्देश दिया था कि गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) इस पूरी राशि को संयंत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में पर्यावरण सुधार और बहाली से जुड़े कार्यों पर ही खर्च करे।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की उन दलीलों पर भी गौर किया, जिसमें बताया गया कि राज्य प्रदूषण बोर्ड को यह रकम केवल पर्यावरण सुधार पर खर्च करने का पूर्व निर्देश दिया जा चुका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के हादसे के मद्देनजर कंपनी के टर्नओवर के पांच प्रतिशत के आधार पर तय किए गए इस पर्यावरणीय हर्जाने में किसी भी तरह की कटौती या ढील देने की मांग को खारिज कर दिया था।

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