महाराष्ट्र में आनंद विवाह अधिनियम को लागू करने की मांग को लेकर सिख दंपत्ति हाईकोर्ट पहुंचे

एक सिख वकील दंपति ने महाराष्ट्र में आनंद विवाह अधिनियम (अधिनियम) को लागू करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पिछले साल शादी करने वाले इस जोड़े ने कानून के तहत अपनी शादी के पंजीकरण की मांग की और 1909 के आनंद विवाह अधिनियम के तहत नियम बनाने की भी मांग की।

याचिका में उल्लेख किया गया है कि अधिनियम को कम से कम 10 राज्यों में पहले ही लागू किया जा चुका है, लेकिन महाराष्ट्र राज्य ने इसके लिए नियम नहीं बनाए हैं। यह बताया गया है कि भले ही अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण के लिए अलग कानून है, महाराष्ट्र में सिखों को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकरण करना होगा।

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याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1909 के आनंद विवाह अधिनियम के तहत महाराष्ट्र में सिख विवाहों का पंजीकरण न होने से अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत गारंटीकृत उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करके सिख जोड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

याचिका के अनुसार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29 संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन आनंद विवाह अधिनियम को लागू न करना याचिकाकर्ताओं के अपनी संस्कृति के संरक्षण के अधिकार का उल्लंघन करता है।

विचाराधीन जोड़े ने अक्टूबर 2021 में औरंगाबाद के एक गुरुद्वारे में शादी कर ली और आनंद विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी को पंजीकृत कराने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया।

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