“क्या उनके पास अपना विमान है?” सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव निगरानी कर रहे पूर्व जजों को भुगतान न करने पर BCI को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को आड़े हाथों लेते हुए राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए नियुक्त पूर्व हाईकोर्ट जजों को उचित मानदेय और यात्रा भत्ता न देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति गरिमा और निष्पक्षता के गंभीर सवाल खड़े करती है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमलिया बागची भी शामिल थे, ने शीर्ष बार निकाय को इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का निर्देश दिया। कोर्ट का यह हस्तक्षेप उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि सेवानिवृत्त जजों को अपनी यात्रा की व्यवस्था खुद करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें उनके पद के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा है।

“क्या उनके पास अपना विमान है?”

यह मामला कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च-स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षी समिति (High-Powered Election Supervisory Committee) के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि द्वारा उठाया गया था। गिरि ने पीठ को सूचित किया कि BCI ने भुगतान बढ़ाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि पूर्व जजों के लिए प्रस्तावित मानदेय “बहुत अधिक” है और यह संभव नहीं है।

इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए CJI सूर्य कांत ने BCI के रवैये की व्यावहारिकता पर सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की:

“आपने चुनाव शुल्क इस आधार पर तय किया था कि इससे चुनाव कराने के लिए पर्याप्त धन उत्पन्न होगा। अब आप सेवानिवृत्त जजों से कह रहे हैं कि आप उन्हें मानदेय नहीं दे सकते, आप यात्रा भत्ता नहीं दे सकते। वे क्या करेंगे? क्या उनके पास अपना विमान है?”

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जजों से अपनी जेब से यात्रा और आवास के लिए भुगतान करने को कहना “सही नहीं” है और यह चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने का काम संभाल रहे व्यक्तियों की गरिमा को कम करता है।

क्या है पूरा विवाद?

वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान व्यवस्था में जजों को खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है, और BCI केवल प्रतिपूर्ति (reimbursement) का प्रस्ताव दे रहा है—जो कि देरी से भरी प्रक्रिया है।

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गिरि ने कोर्ट को बताया, “एक जज ने कहा कि सभी बुकिंग जजों को खुद करनी पड़ती है। जब वे वहां पहुंचते हैं, तो दी जाने वाली सुविधाएं पूर्व चीफ जस्टिस के स्तर के अनुरूप भी नहीं होती हैं।” उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह या तो उचित निर्देश जारी करे या पर्यवेक्षी समिति के प्रमुख जस्टिस (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए अधिकृत करे।

BCI चेयरमैन ने दिया समाधान का आश्वासन

शुरुआत में, BCI के वकील ने कहा कि भुगतान का प्रस्ताव देते हुए एक हलफनामा दायर किया गया है। हालांकि, गिरि ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इसमें केवल प्रतिपूर्ति की बात कही गई है, जो कि परिस्थितियों को देखते हुए अपर्याप्त है।

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बाद में, BCI के चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा पीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने कहा कि BCI ने संबंधित पत्र को जस्टिस धूलिया की अध्यक्षता वाली पर्यवेक्षी समिति को भेज दिया है।

CJI ने मिश्रा से कहा, “कृपया इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाएं,” जिस पर BCI चेयरमैन ने पीठ को आश्वासन दिया कि मामले का समाधान कर लिया जाएगा।

राजस्थान चुनाव को लेकर विवाद

वित्तीय विवाद के अलावा, कोर्ट को राजस्थान राज्य बार काउंसिल चुनावों के संचालन में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के बारे में भी सूचित किया गया। गिरि ने बताया कि BCI ने राजस्थान के लिए एक अलग समिति का गठन किया है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च-स्तरीय चुनाव समिति को दरकिनार करती है। BCI का तर्क था कि कोर्ट के पिछले आदेश में राज्य का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया था।

गिरि ने इस कार्रवाई को कोर्ट के आदेश की “भावना और शब्दों” के विपरीत बताते हुए कहा कि इस स्वतंत्र रूप से गठित समिति ने राज्य में चुनावों की अधिसूचना भी जारी कर दी है।

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इस पर संज्ञान लेते हुए, CJI ने BCI के वकील से सवाल किया: “आपने राजस्थान को शामिल क्यों नहीं किया, और आप अलग से समिति का गठन क्यों कर रहे हैं?”

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को बुधवार तक दोनों मुद्दों—भत्तों का भुगतान न करने और अलग राजस्थान समिति के गठन—पर जवाब देने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

यह विवाद राज्य बार काउंसिल के भीतर समय पर और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों की पृष्ठभूमि में उभरा है। इसके लिए, कोर्ट ने विभिन्न राज्यों में पूर्व हाईकोर्ट चीफ जस्टिस और जजों की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय चुनाव समितियों का गठन किया था।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक केंद्रीय उच्च-स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षी समिति कर रही है, जिसमें जस्टिस (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया, जस्टिस रवि शंकर झा (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि शामिल हैं।

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