दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: AIIMS समेत सरकारी अस्पतालों के बाहर मरीजों और तीमारदारों के लिए ठंड-गर्मी से बचाव की आपात योजना बनाएं

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को निर्देश दिया है कि वह AIIMS समेत प्रमुख सरकारी अस्पतालों के बाहर खुले में रहने को मजबूर मरीजों और उनके तीमारदारों को गर्मी और सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए आपातकालीन कार्ययोजनाएं तैयार करे।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे AIIMS के बाहर सड़कों पर इलाज की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों और उनके परिजनों की “दयनीय स्थिति” पर प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर शुरू किया गया था।

कोर्ट ने आदेश दिया कि DUSIB साल में दो अल्पकालिक आपात योजना तैयार करे — एक गर्मी के लिए और एक सर्दी के लिए — जिन्हें निगरानी समिति की स्वीकृति के बाद लागू किया जाए।

पीठ ने कहा कि गर्मी की योजना जनवरी-फरवरी में बनाई जानी चाहिए और मई-जून में लागू होनी चाहिए, जबकि आवश्यकता होने पर इसे जुलाई-अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, सर्दी की योजना जुलाई-अगस्त में तैयार होनी चाहिए और दिसंबर से फरवरी के बीच क्रियान्वित की जाए।

इन योजनाओं को दक्षिण जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में समन्वय बैठक में मंजूरी दी जाएगी, जिसके बाद इन्हें लागू किया जा सकेगा।

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AIIMS द्वारा कोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पताल परिसर और उसके आसपास मरीजों और तीमारदारों के लिए आश्रय, परिवहन, सुरक्षा, स्वच्छता, भोजन सहायता और निगरानी की व्यवस्था की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, DUSIB, NDMC, MCD, CPWD, PWD और दिल्ली पुलिस समेत अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय से 750 बिस्तरों वाले रैन बसेरे पूरी तरह चालू हैं और पूरी क्षमता से भरे हुए हैं।

AIIMS के सुरक्षा कर्मियों और दिल्ली पुलिस द्वारा सड़कों पर रुके लोगों को व्यवस्थित रूप से ‘पगोडा शेल्टर’ में स्थानांतरित किया गया है, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। साथ ही, अस्पताल परिसर में मुफ्त ई-शटल सेवा भी चलाई जा रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि ‘सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेज़ (SPYM)’ नामक गैर-लाभकारी संस्था की मदद से सभी शेल्टर साइटों पर सुबह की चाय और दिन में दो बार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

AIIMS के सुरक्षा कर्मियों की 24×7 तैनाती के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष निगरानी की जा रही है, खासकर रात के समय। सफाई व्यवस्था भी लगातार जांची जा रही है और इसे और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “22 जनवरी की स्थिति के अनुसार, सभी पगोडा शेल्टर रात के समय पूरी तरह भरे हुए हैं, जो क्षमता प्रबंधन की आवश्यकता को दर्शाता है।”

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कोर्ट ने इन समन्वित प्रयासों की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि इन्हें भविष्य में किसी चूक से बचाने के लिए सतत निगरानी और सुव्यवस्थित योजना की आवश्यकता है।

16 जनवरी को कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से भी अपील की थी कि वह विश्राम सदन के लिए फंड इकट्ठा करे, जैसा कि पंजाब में आई बाढ़ के समय किया गया था।

सोमवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने कोर्ट को सूचित किया कि बार सदस्यों से योगदान जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

AIIMS ने कोर्ट को बताया कि वह “मरीज-केंद्रित और मानवीय” दृष्टिकोण अपनाते हुए इस संकट से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान ने DUSIB को ज़मीन उपलब्ध कराई है जहां 80 नए नाइट शेल्टर बनाए जाएंगे। साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों के लिए 3000 बिस्तरों वाला एक बड़ा विश्राम सदन बनाने की भी योजना है।

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हाईकोर्ट इस मामले की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि दिल्ली की भीषण सर्दी और गर्मी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर मरीजों और तीमारदारों को राहत मिल सके।

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