दो या अधिक गंभीर आपराधिक मामलों में लंबित वकील बार काउंसिल चुनाव नहीं लड़ सकते: नियम की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने BCI व तेलंगाना बार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और तेलंगाना राज्य बार काउंसिल से जवाब तलब किया है। यह जवाब उस याचिका पर मांगा गया है जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम, 2023 के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है जो ऐसे वकीलों को बार काउंसिल चुनाव लड़ने से रोकता है जिनके खिलाफ दो या अधिक गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने तेलंगाना के वकील श्रीनिवास जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उन्होंने दो लंबित गंभीर आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया। यह निर्णय उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति द्वारा बरकरार रखा गया था।

विवादित नियम 4 के अनुसार, यदि किसी वकील के खिलाफ दो या अधिक ऐसे आपराधिक मामले लंबित हों जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो, और वे चुनाव की तारीख से नौ माह पूर्व तक लंबित हों, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा। हालांकि, केवल एक मामला लंबित होने पर यह अयोग्यता लागू नहीं होती।

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इस नियम में यह भी प्रावधान है कि प्रत्याशी को किसी भी अनुशासनात्मक समिति द्वारा दंडित नहीं किया गया हो, न ही कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नौ महीने की अवधि के भीतर लंबित हो। इसके अलावा, उम्मीदवार को नियमित रूप से वकालत कर रहा होना चाहिए और किसी अन्य पेशे में संलग्न नहीं होना चाहिए। लेख विशेषज्ञ या किसी वादी के समर्थन में गवाह के रूप में पेश होने वाले वकील भी चुनाव नहीं लड़ सकते।

नामांकन खारिज किए जाने पर वकील तीन दिन के भीतर बार काउंसिल की केंद्रीय चुनाव न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं, जिसकी निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर अयोग्यता घोषित करना संविधान में निहित निर्दोषता के अनुमान (presumption of innocence) के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो भारतीय दंड प्रक्रिया का मूल हिस्सा है।

शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर BCI और तेलंगाना बार काउंसिल को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की है।

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