गाजियाबाद में पिछले महीने चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए कथित दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम सुनवाई की। अदालत ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) या सीबीआई (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने की पिता की याचिका पर अगली सुनवाई 24 अप्रैल के लिए तय की है। याचिकाकर्ता ने पुलिस की शुरुआती लापरवाही और जांच में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमालय बागची की पीठ ने इस मामले की कार्यवाही के दौरान पीड़ित परिवार को दी गई चार्जशीट की प्रतियों में खामियों पर गौर किया।
सुनवाई के दौरान उस वक्त मोड़ आया जब पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन से पूछा कि क्या उन्होंने पुलिस की चार्जशीट का अध्ययन किया है। इस पर हरिहरन ने अदालत को बताया कि उन्हें चार्जशीट की जो प्रति मिली है, उसके कई पन्ने ‘ब्लैक आउट’ (मिटाए हुए या काले किए हुए) हैं। उन्होंने कहा कि इस वजह से वे पुलिस जांच की गहराई का सही आकलन करने में असमर्थ हैं।
पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि याचिकाकर्ता के वकील को जल्द ही चार्जशीट की पूरी और स्पष्ट प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी। पीठ ने इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा, “हम इस पर शुक्रवार (24 अप्रैल) को विचार करेंगे।” इससे याचिकाकर्ता को पूरी चार्जशीट की जांच कर यह बताने का समय मिलेगा कि जांच में कहां खामियां रह गई हैं।
यह दर्दनाक मामला 16 मार्च का है, जब गाजियाबाद में एक पड़ोसी ने चॉकलेट दिलाने के बहाने चार साल की बच्ची को कथित तौर पर अगवा कर लिया था। बाद में बच्ची बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिली थी। पुलिस और प्रशासन की विफलता के आरोपों के बाद यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्थानीय अधिकारियों के रवैये पर पहले भी कड़ी नाराजगी जता चुका है। 13 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने में दिखाई गई “हिचकिचाहट” पर सवाल उठाए थे। इससे पहले, 10 अप्रैल को कोर्ट ने पुलिस के “असंवेदनशील दृष्टिकोण” की आलोचना की थी और इस बात पर दुख व्यक्त किया था कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया था, जिसके बाद सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
अदालत को सूचित किया गया कि 3 अप्रैल को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और संबंधित अदालत ने इस पर संज्ञान भी ले लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले पुलिस को निर्देश दिया था कि वह पीड़ित परिवार को चार्जशीट मुहैया कराए ताकि वे तय कर सकें कि क्या अभी भी स्वतंत्र एसआईटी जांच की आवश्यकता है। अब 24 अप्रैल की सुनवाई में यह तय होगा कि मौजूदा जांच पर्याप्त है या मामले में किसी उच्च स्तरीय निगरानी की जरूरत है।

