लखनऊ, 20 अप्रैल, 2026 — इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने आज याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा श्री राहुल गांधी और तीन अन्य के खिलाफ दायर आवेदन (Application U/S 528 BNSS No. 673 of 2026) की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। कोर्ट ने यह निर्णय याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई उन पोस्ट्स के बाद लिया, जिन्हें कोर्ट ने न्यायपीठ पर आक्षेप लगाने के समान माना।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत एक आवेदन दायर किया था। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता की पुलिस जांच के निर्देश देने वाली धारा 173(4) BNSS के आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। मामला पहली बार 16 अप्रैल, 2026 को सूचीबद्ध हुआ था, जब यह पाया गया कि संलग्न आवेदन के कुछ पन्ने गायब थे। याचिकाकर्ता को पूरक हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया गया और मामले को 17 अप्रैल, 2026 के लिए नियत किया गया।
17 अप्रैल, 2026 का आदेश और नोटिस का कानूनी मुद्दा
17 अप्रैल, 2026 को भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, सरकारी अधिवक्ता, अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ताओं और केंद्र सरकार के वकील सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद, कोर्ट ने खुली अदालत में फैसला सुनाया। हालांकि, निर्णय टाइप होने और हस्ताक्षरित होने से पहले, जस्टिस विद्यार्थी के संज्ञान में इसी हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ (Full Bench) का निर्णय आया (जगन्नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2014)। इस निर्णय में यह निर्धारित किया गया था कि धारा 156(3) CrPC के तहत आवेदन खारिज होने के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण में संभावित आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने पाया कि यही सिद्धांत धारा 173(4) BNSS के आवेदन की अस्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिका पर भी लागू होता है। चूंकि सुनवाई के दौरान डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सहित सभी अधिवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा था कि प्रस्तावित आरोपी (विपक्षी संख्या 1) को नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है, कोर्ट ने पाया कि इस कानूनी बिंदु पर उनकी सहायता त्रुटिपूर्ण थी। अतः, कोर्ट ने पहले से डिक्टेट किए गए आदेश पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और कानूनी प्रश्न पर विचार करने हेतु मामले को 20 अप्रैल, 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
याचिकाकर्ता की सोशल मीडिया पोस्ट्स
17 अप्रैल के आदेश के बाद, याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर कई संदेश पोस्ट किए। एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि “कांग्रेस पार्टी द्वारा बड़े पैमाने पर बैक रूम एक्सरसाइज की जा रही है और डीप स्टेट तत्वों द्वारा सभी को देर रात फोन कॉल किए जा रहे हैं,” और इसे “फाउल प्ले” बताया। उन्होंने यह भी लिखा कि R&AW और इंटेलिजेंस ब्यूरो सभी पर नजर रख रहे हैं और इसे “असली युद्ध” करार दिया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जनता से भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया।
कोर्ट की टिप्पणियां और रिक्यूजल (Recusal)
जस्टिस विद्यार्थी ने आज के आदेश में उल्लेख किया कि इन संदेशों से संकेत मिलता है कि याचिकाकर्ता का कोर्ट से विश्वास उठ गया है और वह आदेश अपलोड न होने पर आक्षेप लगा रहे हैं—जबकि 17 अप्रैल के हस्ताक्षरित आदेश में इसकी स्पष्ट व्याख्या की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही बाद की एक पोस्ट में याचिकाकर्ता ने इस कोर्ट में कार्यवाही जारी रखने पर जनमत मांगा और विश्वास जताया, लेकिन पिछली पोस्ट्स पहले ही आक्षेप लगा चुकी थीं, जिससे कोर्ट के लिए मामले की सुनवाई जारी रखना अनुचित हो गया।
याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि कोर्ट खुद को अलग न करे और तर्क दिया कि उनकी कोई भी पोस्ट कोर्ट के खिलाफ नहीं थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्णय किसी वादी की प्रशंसा से प्रभावित नहीं होते हैं और सोशल मीडिया पोस्ट्स को हटने के लिए पर्याप्त कारण माना।
अधिवक्ताओं की आलोचना
मामले को छोड़ने से पहले, जस्टिस विद्यार्थी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि उपस्थित सभी अधिवक्ता—जिनमें डिप्टी सॉलिसिटर जनरल और सरकारी अधिवक्ता शामिल थे—कोर्ट को सही कानूनी सहायता प्रदान करने में विफल रहे। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘लाल बहादुर गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2019)’ मामले का हवाला देते हुए जोर दिया कि वकील, कोर्ट के अधिकारी (Officers of the Court) के रूप में, सही कानूनी स्थिति पेश करने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं, चाहे वह उनके पक्ष के हित में हो या न हो।
आगे की कार्यवाही
जस्टिस विद्यार्थी ने निर्देश दिया है कि मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दूसरी बेंच के नामांकन के लिए रखा जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नव-नामांकित बेंच के समक्ष पक्षों को इस सवाल पर बहस करने का पूरा अवसर मिलेगा कि क्या प्रस्तावित आरोपी को नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
Case Details:
Case Title: S. Vignesh Shishir v. Sri Rahul Gandhi and 3 Others
Case No.: Application U/S 528 BNSS No. 673 of 2026
Bench: Justice Subhash Vidyarthi
Date: April 20, 2026

