सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य पब्लिक स्कूल को बंद करने का दिया आदेश: कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और कर्ज अदायगी में चूक पर सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कोल्हापुर स्थित चैतन्य पब्लिक स्कूल एंड जूनियर कॉलेज को 1 मई, 2026 से स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने चैतन्य बहुउद्देशीय शिक्षण प्रसारक मंडल द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने “कानून के शासन के प्रति अत्यंत अरुचि” दिखाई है और बार-बार अदालती आदेशों की अवहेलना करके अवमानना की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

कानूनी विवाद की शुरुआत याचिकाकर्ताओं द्वारा लिए गए वित्तीय ऋण की अदायगी न करने से हुई। याचिकाकर्ताओं ने ‘ऑक्सिलो फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड’ (Secured Creditor) से वित्तीय सहायता ली थी, लेकिन कर्ज चुकाने में विफल रहे। इसके परिणामस्वरूप, SARFAESI अधिनियम की धारा 13 के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

13 सितंबर, 2021 को धारा 13(2) के तहत लगभग 5.06 करोड़ रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया था। साल 2023 और 2024 के बीच ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) और बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष कई आश्वासन और हलफनामे देने के बावजूद, याचिकाकर्ता अपने वादे निभाने में विफल रहे। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने 29 नवंबर, 2024 को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता अभिभावकों को सूचित करें कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्कूल बंद रहेगा, लेकिन इस निर्देश का भी पालन नहीं किया गया।

पूर्व कार्यवाही और कोर्ट द्वारा दी गई रियायतें

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तब पहुँचा जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 जून, 2025 को सुरक्षित लेनदार (Secured Creditor) को स्कूल का कब्जा दिलाने के लिए पुलिस सहायता का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने पाया था कि अधिकृत अधिकारी को कब्जा सौंपे जाने के बाद भी लोगों के समूहों ने बार-बार संपत्ति पर अतिक्रमण किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में 4 जुलाई, 2025 को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 19 अगस्त और 23 सितंबर, 2025 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने छात्रों के हितों और लेनदार के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया। कोर्ट ने एक प्रशासक (Administrator) नियुक्त करने का आदेश दिया था और अभिभावकों को अपने बच्चों का दाखिला नजदीकी पांच स्कूलों में कराने की सलाह दी थी।

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असहयोग और अवमानना की शिकायतें

सुरक्षित लेनदार ने कोर्ट में आवेदन (I.A. No. 67814 of 2026) दायर कर आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने प्रशासक को कार्यभार संभालने से रोका और कोर्ट की रोक के बावजूद छात्रों का दाखिला जारी रखा।

महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश वकील ने इन दावों का समर्थन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने प्रशासक को कोई भी दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं सौंपा है। उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता कोर्ट के आदेशों की “जानबूझकर और निरंतर अवहेलना” कर रहे हैं।

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कोर्ट का विश्लेषण और महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

पीठ ने गौर किया कि इतनी रियायतें मिलने के बाद भी याचिकाकर्ताओं ने अपने व्यवहार में सुधार नहीं किया। कोर्ट ने टिप्पणी की:

“प्रशासक को कार्यभार संभालने की अनुमति न देकर, याचिकाकर्ताओं ने कानून के शासन के प्रति पूर्ण अनादर प्रदर्शित किया है और समय-समय पर इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा करके पहले से ही की गई अवमानना को और गंभीर बना दिया है।”

हालांकि कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता अवमानना के दोषी हैं, लेकिन इस चरण में औपचारिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने के बजाय, कोर्ट ने स्कूल के कब्जे और छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्राथमिकता दी।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं:

  1. स्कूल की बंदी: स्कूल को 1 मई, 2026 के पूर्वाहन से “हमेशा के लिए” बंद करने का निर्देश दिया जाता है।
  2. ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC): याचिकाकर्ताओं को उन सभी छात्रों को टीसी जारी करनी होगी जो पास के पांच स्कूलों या कहीं और अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं।
  3. पुलिस सहायता: कोल्हापुर के पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया जाता है कि वे सुरक्षित लेनदार को संपत्ति का “शांतिपूर्ण और खाली कब्जा” प्राप्त करने में पर्याप्त सहायता और सहयोग प्रदान करें।
  4. नया मूल्यांकन और नीलामी: कब्जा प्राप्त करने के बाद, सुरक्षित लेनदार को सरकारी मूल्यांकक (Government Valuer) से संपत्ति का नया मूल्यांकन कराना होगा और उसी के आधार पर नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य (Reserve Price) तय किया जाएगा।
  5. जुर्माना: याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर सुरक्षित लेनदार को 1 लाख रुपये का हर्जाना देना होगा।
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कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश के पालन में कोई बाधा डाली, तो वे अपने “जोखिम और खतरे” पर ऐसा करेंगे। कोर्ट ने सचेत किया कि आगे की कड़ी कार्रवाई के परिणाम उनके लिए “सुखद नहीं होंगे।”

केस विवरण

केस का शीर्षक: चैतन्य बहुउद्देशीय शिक्षण प्रसारक मंडल और अन्य बनाम ऑक्सिलो फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड और अन्य

केस संख्या: स्पेशल लीव पिटीशन (C) संख्या 19540/2025 (I.A. संख्या 67814/2026 के साथ)

पीठ: जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा

दिनांक: 22 अप्रैल, 2026

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